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एमसीडी उप चुनाव : तीनों पार्टियों के लिए बना नाक का सवाल

Mon, 16 May 2016 02:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली नगर निगम उपचुनाव को तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना रखा है। यही वजह रही कि तपती गर्मी में आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता व विधायक, भाजपा के सांसद व कांग्रेस नेताओं ने पोलिंग स्टेशन पर मोर्चा संभाल रखा था। पूर्वी दिल्ली के दोनों वार्डों में आप के 18 विधायक नियमित तौर पर दौरा करते दिखे। वहीं, प्रदेश संयोजक दिलीप पांडेय व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल भी पोलिंग स्टेशन का जायजा लेते रहे।
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- फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ झिलमिल वार्ड पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नरेन्द्र नाथ वोटरों को स्लिप बांटते दिखे। जबकि भाजपा सांसद महेश गिरी व स्थानीय जिला महामंत्री श्रवण दीक्षित ने भी पोलिंग स्टेशनों पर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
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- फोटो : अमर उजाला
कही मतदाताओं की लंबी लाइन तो कई बूथ सूना : दिल्ली के पॉश इलाकों में शुमार शालिमार बाग उत्तरी एमसीडी वार्ड का उप चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। इसी तरह वजीरपुर एमसीडी वार्ड में मतदान केंद्रों पर कही मतदाताओं की लंबी लाइन लगी थी तो कही बूथ सूने थे।

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- फोटो : अमर उजाला
दोनों वार्ड के उपचुनाव में गर्मी के बावजूद महिलाओं ने बढ़चढ़ कर मतदान किया। शालीमार बाग वार्ड के सहीपुर गांव के प्राइमरी स्कूल में दोपहर बाद महिला मतदाताएं
अपना मत डालते दिखीं। 
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- फोटो : अमर उजाला
यहां कई मतदाता मतदान केंद्र से बिना वोट डाले भी लौटते दिखें। दरअसल बिना पहचान पत्र के इस केंद्र पर वोट उन्हें नहीं डालने दिया गया। वजीरपुर वार्ड में भी कुछ बुथ पर लाइन लगाकर मतदान करते मतदाता दिखें। वजीरपुर के ग्रामीण इलाकों में गर्मी का परवाह किए बगैर मतदाता केंद्र पर मतदान करते मतदाता दिखें।
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- फोटो : अमर उजाला
उधर, उपचुनाव में राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं में जबदस्त उत्साह दिखा। महज 13 वार्ड में चुनाव के कारण मुख्य तीनों राजनीतिक पार्टियों ने बड़ी संख्या में
कार्यकर्ताओं को मतदान बूथ के बाहर व मतदाओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेवारी सौंपी थी।
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- फोटो : अमर उजाला
जगह-जगह भाजपा, आप व कांग्रेस का पार्टी चुनाव दफ्तर खोला गया था। जहां कार्यकर्ताओं के लिए खाने-पीने का बेहतर इंतजाम किया गया था। इन दफ्तरों में पार्टी विधायक, पार्षद व पूर्व पार्षद तैनात थे। उपचुनाव में राजनीतिक पार्टियों महिला कार्यकर्ता भी जमकर कमान संभाली थी। यहां तक वोटिंग के लिए पर्ची बनाने का काम भी महिला कार्यकर्ता कर रही थी।

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- फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं, पाने को बहुत कुछ : दिल्ली नगर निगम उपचुनाव में कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है। कांग्रेस वोट प्रतिशत बढ़ाने से सीटें पाने तक जो कुछ करेगी, सब कुछ पार्टी के लिए पाया माना जाएगा। पार्टी निगम चुनाव 2007, 2012, विस चुनाव 2013 और 2015 में कभी इन 13 वार्ड में पहले नंबर पर नहीं रही है। जो कुछ मिलेगा, उसे पंजाब चुनाव में भी पार्टी भुनाएगी। कांग्रेस नेता मतदान ट्रेंड और क्षेत्र में मिले रूझान को लेकर काफी खुश नजर आ रहे हैं।

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- फोटो : अमर उजाला
निगम उपचुनाव कांग्रेस के हैवीवेट नेताओं के लिए भी कठिन परीक्षा है। बल्लीमारान में पूर्व मंत्री हारून यूसुफ, खिचड़ीपुर में विस के पूर्व अध्यक्ष अमरीश सिंह गौतम,
नवादा में मुकेश शर्मा, भाटी में बलराम तंवर, वजीरपुर में हरिशंकर गुप्ता का ताकत दिखानी है। नेता मानकर चल रहे हैं कि इस कठिन समय में कांग्रेस के लिए जो
प्रत्याशी सीट लेकर आएगा, उसे पार्टी सिर माथे बिठाएगी। बतौर प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन का भी पहला चुनाव है। कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि माकन अपने चुनावी अनुभव को प्रचार, स्टार प्रचारक और चुनाव लड़ने के तरीके पर आजमाया है। पार्टी ने आम आदमी पार्टी में छिटके मतदाताओं की वापसी कराने केलिए प्रचार में सबसे अधिक हमले केजरीवाल सरकार पर ही किए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
चुनावी रणनीति से जुड़े एक कांग्रेसी नेता का कहना है, तेरह वार्ड में ज्यादातर वो हैं जिसमें आम आदमी पार्टी से विधायक बने नेता पहले निर्दलीय या अन्य पार्टी से
पार्षद रहे हैं। वहीं भाजपा के जितेन्द्र सिंह शंटी और विनोद कुमार बिन्नी अपनी-अपनी सीट पर पार्षद रहे हैं। अजय माकन का कहना है कि दिल्ली के लोगों के उत्साहपूर्वक मतदान से साफ प्रतीत होता है कि जनता ने आप सरकार और भाजपा की निगम में सरकार के खिलाफ मतदान किया है। परिणाम चौंकाने वाले होंगे जिसमें कांग्रेस पार्टी को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है। वहीं, दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने दावा किया है कि तीनों नगर निगम के 13 वार्डों के उपचुनावों में भाजपा का प्रदर्शन सबसे बेहतर होगा। पोलिंग बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से फीडबेक काफी अच्छा मिला है। दूसरी ओर उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयोग के अधिकारी आम आदमी पार्टी के नेताओं के आगे नतमस्तक रहे। उन्होंने मंत्रियों, विधायकों एवं आप नेताओं को आचार संहिता के खुले उल्लंघन की छूट दी।
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