फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश के लिए जान गंवाने वाले वीर पिता को छह साल के बेटे ने दी अंतिम विदाई

Sat, 04 Jun 2016 12:41 PM IST
संजय मग्गू/अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
1 of 5
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र के वर्धा जिले के पुलगांव स्थित केंद्रीय आयुष भंडार में लगी आग में अपनी जान गंवाने वाले गांव बंचारी निवासी कृष्ण कुमार सौरोत को शुक्रवार की देर शाम अंतिम विदाई दी गई। शहीद को उनके छह वर्षीय पुत्र ने गमगीन माहौल में मुखाग्नि दी। शहीद कृष्ण कुमार का पार्थिव शरीर समय से करीब छह घंटे देरी से गांव में पहुंचा। पहले पार्थिव शरीर दोपहर 12 बजे तक पहुंचना था, लेकिन सुबह नासिक से उड़ान भरते समय विमान में आई तकनीकी कमी के चलते शाम को करीब साढ़े छह बजे पहुंचा।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के सम्मान में बंचारी सहित आस-पास के गांवों के हजारों लोग जमा थे। जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम प्रताप सिंह, प्रदेश सरकार की तरफ से मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा व सीएम के राजनीतिक सचिव दीपक मंगला, होडल के कांग्रेसी विधायक उदयभान, पूर्व मंत्री हर्ष कुमार व पूर्व मंत्री जगदीश नायर ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। एसपी मेवात दीपक गहलावत की अगुवाई में असम रेजीमेंट व हरियाणा पुलिस की टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर शहीद को सलामी दी।
विज्ञापन

3 of 5
- फोटो : अमर उजाला
आयुष भंडार में हुई आगजनी में शहीद होने वाले 28 वर्षीय कृष्ण कुमार दिसंबर 2012 में एमएचए में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह एमएचए की 111 वीं बटालियन में फायर मैन के पद पर तैनात थे। शहीद कृष्ण कुमार के बड़े भाई ओमप्रकाश भी मणिपुर कैंट में राइफलमैन के पद पर तैनात हैं। शहीद कृष्ण कुमार को जब उनके छह वर्षीय पुत्र प्रीत ने मुखाग्नि दी तो सारा माहौल गमगीन हो उठा। उपस्थित लोगों ने शहीद कृष्ण कुमार अमर रहें व भारत माता की जय का नारों से आसमान को गुंजायमान कर दिया। 

4 of 5
- फोटो : अमर उजाला
एनएच-2 पर स्थित गांव बंचारी की बृज क्षेत्र में अलग ही पहचान रही है, लेकिन उसके साथ ही साथ अब यह गांव शहीदों के गांव के रूप में भी पहचान बना रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, कृष्ण कुमार के शहीद होने पर उनको बहुत गर्व है। उनसे पूर्व भी गांव के तीन वीर जवान देश के लिए अपनी शहादत दे चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
- फोटो : अमर उजाला
वीर चक्र विजेता महिपाल ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। दूसरे शहीद हुए दीपचंद, जिन्होंने चीनी सेना को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था। तीसरे शहीद वीरबल बार्डर पर शहीद हुए थे, जिन्होनें दुश्मनों को देश की सीमा के अंदर नहीं घुसने दिया था तथा लड़ते-लड़ते अपनी शहादत दे दी थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें