दिल्ली की खराब आबोहवा के बाद डॉक्टरों ने स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इनका मानना है कि सरकार भले प्रदूषण से बचाव के तरीके अपनाए, लेकिन इसके असर को रोका नहीं जा सकता।
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smog in delhi
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डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रदूषण का मुख्य असर दो वर्ष बाद देखने को मिलेगा। यह लिवर, फेफड़े और किडनी को प्रभावित करता है। प्रदूषण दो या तीन दिन बाद कम भले हो जाए, लेकिन इससे होने वाली हानि कम नहीं हो सकती।
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मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा के अनुसार, प्रदूषण का असर धीरे-धीरे पता चलता है। भले इस वक्त प्रदूषण सबसे ज्यादा हो, लेकिन इसका असर आने वाले वक्त में ही पता चलेगा।
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प्रदूषण ज्यादा होने से खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण तत्काल देखने को मिलते हैं। हम कुछ समय बाद की बात करें तो किडनी फेल्योर और लंग्स कैंसर जैसी बीमारियों के लक्षण उभरने लगते हैं।
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दरअसल, इन दिनों में दिल्ली में हर वर्ष प्रदूषण का रिकॉर्डतोड़ प्रभाव दिखता है। लोगों का दम घुटने लगता है। कुछ समय बाद प्रदूषण कम होता है तो सरकार से लेकर आम जनता तक हर कोई इसे भूल जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि एक बार प्रदूषण चरम पर पहुंच गया तो लोगों को बाद तक बीमार बना देता है।
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ऑड-ईवन हुआ लागू
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दृष्टि भी होती है प्रभावित
नेत्र रोग विशेषज्ञ आई7 के निदेशक डॉ. संजय चौधरी का भी कुछ ऐसा ही मानना है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन की शिकायत होती है। लंबे समय तक लापरवाही बरती तो दृष्टि भी प्रभावित होती है।
फेफड़ों में तेजी से बढ़ता है कैंसर
डॉक्टर इंस्टा के वरिष्ठ डॉ. अमरजीत भाटिया बताते हैं कि भारत और चीन में प्रदूषण के लगभग एक जैसे हालात मिलते हैं। दोनों ही देशों में फेफड़ों के कैंसर की वजह मुख्य तौर पर प्रदूषण है। घरेलू प्रदूषण (चूल्हा, धुंध) से महिलाएं भी इस खतरनाक बीमारी का शिकार हो रही हैं। वहीं, एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि प्रदूषण इंसान को अंदर ही अंदर जला रहा है। इस प्रदूषण से श्वास नली तक प्रभावित होती है।