खूनी नदी दिल्ली के रोहिणी में बहती है। ये माना जाता है कि जो भी इस नदी में जाता है ये नदी उसे अपनी रहस्यमयी शक्तियों से लील लेती है। कई लोगों ने इसमें जाने के बाद अपनी जान गंवा दी है। जो बाद में आत्महत्या जैसा लगता है। इसका कारण आजतक लोगों को पता नहीं चल सका है।
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इन 14 जगहों पर है रूहानी ताकतों का कब्जा
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भूली भटियारी का महल झंडेवालान मेट्रो स्टेशन के पास दिल्ली-5 में पडता है। यह भी तुगलकों के शिकार का ही लॉज माना जाता है। कहा जाता है कि इसका नाम बू-अली भट्टी के नाम पर पड़ा जो महिला इसकी देखभाल करती थी। जिसे बाद में भूली भटियारी के नाम से पुकारा जाने लगा। यह महल कई सदियों से खाली पड़ा हुआ है और शायद इसीलिए इसे भूतिया जगह माना जाता है। जहां से कई तरह की आवाजें आती हैं।
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संजय वन दिल्ली में 10 किलोमीटर तक फैला है और इसे दिल्ली का ग्रीन लंग भी माना जाता है। लेकिन एक बहुत बड़ा ठप्पा जो इस पर लगा है वो है भूतिया वन होने का। इसका कारण है यहां बने बहुत सारे मजार और कब्रें। इसके साथ ही किला राय पिथोरा के टूटे अवशेष भी यहां मौजूद हैं। कई लोगों ने यहां रोते बिलखते बच्चों की आवाज सुनने की बात कही है जो इसके अस्तित्व में आने के बाद से ही है।
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मलचा महल मलचा गांव में स्थित है। ये दिल्ली अर्थ स्टेशन के पास बिस्तारी रोड, सरदार पटेल मार्ग, नई दिल्ली-21 में पड़ता है। यह महल जंगलों से घिरा हुआ जिसे दिल्ली की चोटी कहते हैं। असल में यह तुगलक काल में शिकार करने की जंगल थी और अब इसके रहस्यमयी होने की वजह के बारे में बहुत कम जानकारी है। लेकिन घने जंगलों से काफी करीब होने के कारण आप यहां जितना डरावना महसूस करेंगे उतना शायद और कहीं नहीं।
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जमाली कमाली मकबरा और मस्जिद मेहरौली के पुरातत्व पार्क, दिल्ली-30 में है। यहां मशहूर सूफी संत जमाली को कमाली के बगल में 1553 में दफनाया गया था। आप अगर यहां एक बार घुस गए तो घुसते ही आपको अजीब सी बेचैनी होने लगेगी। इसके साथी ही आप तरह तरह की आवाजें आपको बुलाती हुई भी सुन सकते हैं। इसलिए यहां रात में जाना बिल्कुल मना है।
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पहली बार फिरोजशाह कोटला किले को देखने के बाद आप इसे भूतिया जगह जरूर कहेंगे क्योंकि यहां बहुत ज्यादा लोग नहीं आते। यह किला फिरोजशाह तुगलक ने 1354 में बनवाया था। यह किला बहादुरशाह जफर मार्ग पर स्थित है। इस मार्ग से एक पतली गली इस मकबरे तक ले जाती है। कहा जाता है कि इस किले के अंधेरे हॉलों में जिन्न रहते हैं। यहां हर बृहस्पतिवार को स्थानीय लोगों को मोमबत्ती, अगरबत्ती जलाते देखा जा सकता है। साथ ही साथ लोग दूध अनाज और चिट्ठियां तक लिखकर छोड़ते हैं ताकि जिन्न उनकी मुराद पूरी कर दे।
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निकोलन की कब्रगाह शहर की पुरानी कब्रगाहों में से एक है। ब्रिटिशों के शासनकाल से ही यहां अंग्रेज सैनिक, उनके बीवी बच्चों को यहां दफनाया जाता रहा है। यहां घुसने पर आप पिन-ड्रॉप साइलेंस का अहसास करेंगे। और जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते जाएंगे आपको लगेगा कि यहां मौजूद बड़े-बड़े इमली के पेड़ों के पीछे छूपा कोई आपका पीछा कर रहा है। आप चाहें तो इन्हें नजरअंदाज कर सकते हैं लेकिन यहां से निकलने से पहले आप खुद को आश्वस्त कर लें कि ये आपके घर तक आपका पीछा न करें।
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दिल्ली रिज अरावली की पहाड़ियों में बसा एक पहाड़ी क्षेत्र है जो जंगलों से घिरा हुआ है जहां गोरी काल के अधिकतर आयोजन हुए हैं। यहां जाने वाले आज भी फिरंगी भूतों को यहां घूमते हुए महसूस कर सकते हैं। यह जगह अपने मूडी भूतों के लिए कुख्यात है। यहां जाने से पहले ये जरूर ध्यान रखें कि इस जगह पर मोबाइल का नेटवर्क नहीं आता।
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म्यूटिनी हाउस अंग्रेजों द्वारा 1857 की लड़ाई में मारे गए उनके सैनिकों की याद में बनाया गया था। लोगों ने यहां चलते सैनिकों के कदमों की आवाजें शाम के समय में सुनी हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत ही डरावनी जगह होगी जो यहां पहली बार आएंगे। ये टेलीग्राफ बिल्डिंग के सामने, कश्मीरी गेट, दिल्ली-55 में स्थित है।
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दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में स्थित घर नंबर W-3 लंबे समय से खाली पड़ा हुआ है। इसी घर में दशकों पहले एक वृद्ध दंपति की हत्या कर दी गई थी। तभी से इस घर को भूतिया माना जाता है। पड़ोसियों का कहना है कि इस घर से लोगों के रोने और चिल्लाने की आवाज आती है। ऐसा ही एक घर ग्रीन पार्क, डिफेंस कॉलोनी, लाजपत नगर, लोधी रोड में है।
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दिल्ली कैंटोनमेंट जो भरपूर हरियाली वाला क्षेत्र है, उस महिला का घर मना जाता है जो एक रोड एक्सीडेंट में यहां मर गई थी। बहुत सारे लोगों ने उसके यहां होने की बात मानी है। उन्होंने उसे सफेद साड़ी में भी देखा है।
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करबला का कब्रिस्तान बीके दत्त कॉलोनी में स्थित है, जहां ताजिए दफनाए जाते हैं। अगर आप इस जगह पर शाम के वक्त जाते हैं तो यहां पसरी खामोशी और वातावरण आपके रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है।
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कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग जो घर जाने के लिए हर रात कैब का इस्तेमाल करते हैं ये बात कही है कि द्वारका सेक्टर-9 के मेट्रो स्टेशन और आसपास कोई अदृश्य महिला उन्हें थप्पड़ मारती है। वो कभी उन्हें दिखती है, कभी नहीं दिखती। ये थोड़ा अजीब लग सकता है पर कई लोग इसे सच मानते हैं।