उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में 12वीं पास छात्रा ने सोमवार को फांसी लगाकर जान दे दी। छात्रा ने मौत से पहले डायरी में लिखा सुसाइड नोट भी लिखा। सुसाइड नोट में छात्रा ने माता-पिता से माफी मांगी है। सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया, लेकिन परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इस पर पुलिस ने पंचनामा भर शव परिजनों को सौंप दिया। छात्रा ने आत्महत्या से पहले गूगल पर जान देने का तरीका ढूंढा था। लेकिन आत्महत्या से पहले छात्रा के पिता ने उसका मोबाइल देख लिया था। छात्रा को माता-पिता ने रातभर समझाया था, लेकिन सुबह होने पर छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आपको बता दें कि कविनगर के दुर्गा एंक्लेव में पढ़ाई के तनाव में आकर 12वीं पास छात्रा ने सोमवार को फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों को मौके से डायरी में लिखा सुसाइड नोट मिला। जिसमें छात्रा ने माफी मांगते हुए लिखा कि सॉरी मम्मी-पापा, जैसा वह चाहते थे, वह वैसी नहीं बन सकी।
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अंशु जैन, सीओ
- फोटो : एएनआई
दुर्गा एंक्लेव निवासी संजय त्यागी नोएडा की एक आईटी कंपनी में नौकरी करते हैं। उनकी बेटी नंदिनी (18) ने इस वर्ष 12वीं पास की थी, जबकि बेटा आदित्य 10वीं का छात्र है। नंदिनी ने सोमवार सुबह कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
परिजनों ने देखा तो उसे फंदे से उतारकर आनन-फानन सर्वोदय अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। कविनगर एसएचओ संजीव शर्मा ने बताया कि परिजनों की गुहार पर पोस्टमार्टम कराए बिना शव उन्हें सौंप दिया गया।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
माता-पिता ने रातभर की काउंसलिंग, सुबह कर ली आत्महत्या
पुलिस के मुताबिक, नंदिनी ने रविवार को गूगल पर सर्च किया था कि नींद की कितनी गोलियां खाने से मौत हो सकती है। पिता संजय ने रविवार रात नंदिनी का मोबाइल देखा तो वह चौंक गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद उन्होंने पत्नी के साथ दोनों बच्चों की काउंसलिंग की। इस पर नंदिनी ने ऐसा न करने का भरोसा भी दिया था, लेकिन सुबह होते ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
डिप्रेशन के लक्षण पहचानें अभिभावक
जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ के साइकेट्रिस्ट कंसलटेंट डॉ. साकेत नाथ तिवारी के मुताबिक, सबसे पहले और बड़ी जरूरत डिप्रेशन के लक्षण को पहचानने की जरूरत है। आत्महत्या कोई भी तत्काल नहीं करता, बल्कि 45 से 90 दिन पहले उसके व्यवहार में बदलाव होने लगता है। इस बदलाव को अगर परिजन पहचान लें तो हादसे को रोका जा सकता है। बच्चों के व्यवहार और आदत में बदलाव के लिए कहीं न कहीं उनके अभिभावक ही जिम्मेदार होते हैं। जब बच्चे अपने माता-पिता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते तो उनके मन में यह डर बना रहता है कि अगर यह बात मम्मी-पापा को मालूम हो गई तो वे उनसे नाराज होंगे। सजा और डांटने से बचने के लिए वह कोई भी रास्ता चुन लेते हैं।