mahatma gandhi kasturba gandhi
राष्ट्रपिता ने लिखा, ‘अपनी आत्मकथा में मुझे कस्तूरबा के गुणों के बारे में लिखने में हिचकिचाहट नहीं हुई। लेकिन मुझे कई कमजोरियां भी मिलीं, जो इन गुणों को मारती हैं। एक या दो साल पहले कस्तूरबा के पास सौ या दो सौ रुपये थे, जो हमें कई लोगों से तोहफे के तौर पर मिले थे। आश्रम के नियम के मुताबिक, वह अपने साथ कुछ भी नहीं रख सकती थी, भले ही वो किसी ने दिया हो।