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प्रदूषण मुक्त दिल्ली का सपना संजोने वाली शीला दीक्षित की ये थी अंतिम इच्छा, जिसे बेटे ने किया पूरा

Mon, 22 Jul 2019 09:16 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शीला दीक्षित का पार्थिव शरीर - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के प्रदूषण व पार्टी की चिंता पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की जेहन में अंतिम समय तक रही। इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली के लिए सार्वजनिक वाहनों को पेट्रोल व डीजल मुक्त किया और सीएनजी लेकर आई। दिल्ली परिवहन में सीएनजी लाने का श्रेय उन्हीं को जाता है और इसी प्रदूषण की चिंता के कारण उनकी चिता चंदन की लकड़ी की जगह सीएनजी से चलने वाली शवदाह गृह में जली। यही उनकी इच्छा भी थी। 
 
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अमूमन राजनेताओं का अंतिम संस्कार चंदन की लकड़ी से किया जाता है पर शीला ने ऐसी इच्छा नहीं जताई थीं। बेटे ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया। दीक्षित ने सार्वजनिक परिवहन में सीएनजी लाने का विरोध भी झेला, लेकिन आज अपरिहार्य बन गया है। अपने इरादों पर अडिग रहने वाली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तमाम विरोधों का सामना कर दिल्ली को हरा-भरा करने का कदम उठाती रही। 
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‘हमारी दिल्ली मैं ही संवारूं’ अभियान के तहत अपने शासनकाल में दिल्ली को गैस का चैंबर बनने से रोकने के कई प्रयास किए। दिल्ली को केरोसिन मुक्त भी किया। सीएनजी आने के पहले शाम के वक्त आईटीओ चौराहे से कोई गुजरता था तो सांस लेना मुश्किल हो जाता था। लिहाजा इस दुनिया को छोड़ने के साथ वह एक परिपाटी छोड़ गई। इसी तरह उनका स्नेह पार्टी से भी रहा। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद जब उन्हें दूसरी पारी के लिए आलाकमान ने दिल्ली की बागडोर सौंपी तो वह मना नहीं कर पाई। 

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अमर उजाला के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा है, इसे मैं इंकार नहीं कर सकती। पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है। 
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इसी तरह उनका अंतिम संदेश कार्यकर्ताओं के लिए यही था कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रियंका गांधी को हिरासत से नहीं छोड़ती है तो आप कांग्रेस कार्यालय पर पहुंचे और वहां से प्रोटेस्ट मार्च निकालें। 
 
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