गाजियाबाद के सिहानी गांव के जिस हिस्से में कल तक चहल-पहल थी, वहां अब झुग्गियों की जगह मलबे का ढेर दिखाई दे रहा है। भीषण अग्निकांड के दौरान इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों ने किसी तरह अपनी जान तो बचा ली, लेकिन अपने आशियाने और खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को नहीं बचा सके। जिसका दर्द इन झुग्गी वासियों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है।
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-गाजियाबाद में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
सब कुछ बर्बाद होने के बाद अब वह फिर से एकजुट होकर जिंदगी की नई शुरुआत में जुट गए हैं। इन पीड़ितों के सामने इस वक्त सबसे बड़ी मुश्किल दो जून की रोटी की है। जिसके लिए वह लोगों की राह ताक रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि न तो इन तक सरकारी मदद पहुंची और न ही समाजसेवा के ठेकेदार बनने वाले किसी संगठन ने इनकी सुध ली।
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अग्निकांड प्रभावित इलाके में मंगलवार को चारों तरफ सन्नाटा पसरा था। दूर तक झुग्गियों की जगह मलबा और राख के ढेर दिखाई दे रहे थे। कई ढेरों में उठता धुआं घंटों बाद भी अग्निकांड की भयावहता बयां कर रहा था। धुआं फिर से कहीं भीषण आग का रूप न ले ले, इसके लिए दहशतदजा पीड़ित लोग मलबे के ढेर में पानी डालकर धुएं को शांत करने में जुटे थे।
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आशियाना स्वाहा हो जाने के बाद पीड़ित झुग्गी वासियों को सिर छिपाने के लिए पास में बने मकानों की छांव का सहारा लेना पड़ रहा था। कुछ लोग चादर और तिरपाल तानकर धूप से बचने की कोशिश कर रहे थे। वहीं, सब कुछ बर्बाद हो जाने के बाद कुछ पीड़ितों को बांस-बल्ली गाड़कर नए आशियाने की शुरुआत करते हुए भी देखा गया।
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अपनी धुन में मस्त दिखे अग्निकांड से बेखबर बच्चे
ढाई साल की बच्ची आशिया भीषण अग्निकांड का शिकार हो गई। इस दर्दनाक घटना से सभी झुग्गीवासी सदमे में हैं। लेकिन उनके सदमे और अग्निकांड से बेखबर बचपन अपनी मस्ती में खोया दिखाई दिया। कहीं, बच्चों को मिट्टी के खिलौने बनाकर खेलते देखा गया तो कहीं, बच्चे खेल में एक-दूसरे के पीछे भागते नजर आए।
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हादसे के बाद सभी झुग्गी वासियों ने रातभर अपने लापता बच्चों की तलाश की। जब तक वह नहीं मिले, उनके हाथ-पांव फूले रहे। लेकिन मंगलवार सुबह सभी बच्चों को सलामत देख लोगों की जान में जान आई। लोगों का कहना है कि आग से दहशत में आए कुछ बच्चे आस-पास के इलाकों में जा छिपे थे, जो सुबह होने के बाद खुद ही वापस लौट आए।
सिहानी गांव में लाजवंती फार्म हाउस के पीछे खाली पड़ी जमीन में करीब साढ़े चार सौ झुग्गियां बसी हुई थीं। सोमवार दोपहर भड़की छोटी सी चिंगारी ने इनमें से सैकड़ों झुगगियों को जलाकर राख कर दिया। आग में झुग्गियों के अलावा तीन दर्जन से अधिक दुकान और गोदाम भी जलकर राख हो गए थे। पीड़ितों के मुताबिक उनकी आजीविका के सभी संसाधन आग की भेंट चढ़ गए। सौ से अधिक ठेली-पटरी और आधा दर्जन दोपहिया वाहन भी जलकर राख हो गए।