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सदमे में सूख गए आंसू: मम्मी पापा सो गए, यह जानकर पड़ोस के घर में सोने चला गया था बेटा, पिता ने आखिरी फोन कर कही थी ये बात

Thu, 24 Feb 2022 11:59 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
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धर्मेंद्र और सरोज का बेटा - फोटो : अमर उजाला
फरीदाबाद पुलिस लाइन स्थित आवास नंबर 60 में हेड कांस्टेबल सरोज के साथ रह रहा 14 वर्षीय बेटा जब ट्यूशन पढ़कर घर लौटा तो घंटी बजाने पर दरवाजा नहीं खुला। मम्मी-पापा को सोया जानकर वह पड़ोस के मकान में जाकर सो गया। सुबह परीक्षा देने के लिए जाना था। उसे क्या पता था कि आने वाली सुबह उसके मां-बाप को हमेशा के लिए छीन लेगी। सुबह की घटना को देखकर मासूम देव इतना सदमे में आ गया कि उसकी आंखों से आंसू तक नहीं निकले।
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धर्मेंद्र और सरोज का बेटा परिजनों के साथ बैठा हुआ - फोटो : अमर उजाला
देव 9वीं कक्षा में पढ़ रहा है। बुधवार को उसकी परीक्षा थी। मंगलवार शाम घर से कुछ ही दूरी पर ट्यूशन पढ़ने के लिए गया था। परीक्षा की तैयारी कारण ट्यूशन में थोड़ी देरी तक पढ़ाई हुई। रात दस बजे के बाद जब देव घर लौटा दरवाजा बंद था। दो-तीन बार घंटी बजाने पर दरवाजा नहीं खुला तो देव ने सोचा कि मम्मी-पापा शायद सो गए हैं। इसलिए वह पड़ोस में पुलिसकर्मी के मकान में जाकर सो गया।
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मॉर्चरी के बाहर मौजूद धर्मेंद्र व सरोज के परिजन - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर 31 थाना प्रभारी बलवंत सिंह ने बताया कि मंगलवार  रात करीब 10 बजे जब हेड कांस्टेबल सरोज का बेेटा देव ट्यूशन पढ़ रहा था तो उस समय उसके पापा धर्मेँद्र ने फोन कर उससे बात की थी और कहा था कि बेटा आराम से पढ़कर आना। कोई जल्दबाजी नहीं है।

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हेड कांस्टेबल सरोज - फोटो : अमर उजाला
पति की सुरक्षित नौकरी को लेकर होती रहती थी कहासुनी
धर्मेँद्र अपनी गाड़ी टैक्सी के रूप में चलाता था। बताया जा रहा है कि सुरक्षित नौकरी ढूंढ़ने को लेकर हेड कांस्टेबल सरोज ने धर्मेँद्र से कई बार बात की। इसे लेकर कहासुनी भी होती रहती थी। आशंका जताई जा रही है कि मंगलवार को भी कुछ ऐसा ही दोनों के बीच हुआ होगा। मृतका सरोज के गले पर निशान पाए गए और मुंह टेप से बंद था।
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सरोज और धर्मेंद्र (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
साथी कर्मचारियों को नहीं हो रहा  यकीन
साथी कर्मचारियों को यकीन ही नहीं हो रहा कि रोजाना उनके साथ काम करने वाली सरोज हमेशा के लिए उन्हें छोड़कर चली गई है। सरोज का शव देखने के लिए बार-बार मोर्चरी में जाते और लौट आते। उनका कहना था कि हमेशा खुश मिजाज रहने वाली सरोज सभी साथियों से घुलमिल कर रहती थी। एनआटी महिला थाना प्रभारी माया ने बताया कि जो भी काम सरोज को दिया जाता था उसे वह गंभीरता से करती थी। 
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