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उद्योग जगत की रीढ़ थे राजन नंदा, शोमैन राजकपूर के दामाद इस बाइक को बनाकर हुए थे माला-माल

Mon, 06 Aug 2018 09:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
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राजन नंदा
ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण निर्माता कंपनी एस्कॉर्टस समूह के चेयरमैन राजन नंदा के निधन पर उद्योग जगत में शोक की लहर है। 76 वर्षीय  नंदा अभिनेता अमिताभ बच्चन के समधी और शोमैन राजकपूर के दामाद थे। फरीदाबाद में उद्योग जगत को फलने फूलने में या यू कहें कि उद्योगों को बसाने में इन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। एस्कॉर्ट्स ग्रुप ने जिले के उद्योगों के लिए ऑक्सीजन का काम किया था। हर छोटा बड़ा उद्यमी कहीं न कहीं एस्कॉर्ट्स ग्रुप से इत्तेफाक रखता है। 
 
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राजन नंदा
पिछले साल 6 सितंबर को राजन नंदा ने फरीदाबाद में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की लांचिंग की थी। शहर के लिए नामचीन होटल में इसके लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जापानी टेक्नोलॉजी वाले इस ट्रैक्टर की लांचिंग पर राजन नंदा ने पत्रकारों से अपने अनुभव भी साझा किए थे। 
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राजन नंदा
अमर उजाला संवाददाता से बात करते हुए राजन नंदा ने उन्हें बताया था कि जापानियों ने इस इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर की तकनीक देने से पहले देश पर यह कहते हुए तंज कसा था कि हिंदुस्तान में बिजली की किल्लत है। ऐसे में ट्रैक्टर को चार्ज कहां करेंगे।  नंदा ने यह भी बताया कि उन्होंने इसका माकूल जवाब जापानियों को दिया था। उन्हें बताया था कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और वह अपने देश और उसकी रीढ़ की हड्डी किसानों के लिए प्रत्येक नई टेक्नोलॉजी लांच करते रहेंगे। 

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फाइल फोटो
अगले माह पेश करने वाले थे विजन 2022 
नंदा ने अगले माह एक कार्यक्रम पहले से ही तैयार कर रखा था। इसके लिए मीडिया को निमंत्रण भी जारी किए जा चुके थे। 6 सितंबर 2018 को आयोजित होने वाले इस निमंत्रण पत्र में विजन-2022, एक्सक्लूसिव-2018 लिखा हुआ है। माना जा रहा है कि अपने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को लेकर ही नंदा अगले माह फरीदाबाद यूनिट में कुछ नई घोषणा करने जा रहे थे। 
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राजन नंदा
इस अवसर पर उन्होंने अपने पिता हरप्रसाद नंदा द्वारा लिखी गई एक किताब द डेज ऑफ माय ईयर्स भी भेंट की थी। उनके पिता ने इस किताब में अपने जीवन के संघर्ष की कहानी बयां की है। हरप्रसाद नंदा गुरुग्राम से वर्ष 1971 में लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। उस समय चौधरी चरण सिंह भारतीय क्रांति दल के प्रधान हुआ करते थे। उन्होंने अपने एक संदेश में हरप्रसाद नंदा को जिताने की अपील की थी। 
 
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श्रद्धांजलि देते हुए
उद्यमियों ने दी श्रद्धांजलि  
राजन नंदा के निधन की सोमवार सुबह जैसे ही खबर आई तो उद्यमियों के फोन घनघनाने लगे। फरीदाबाद से उद्यमियों का एक प्रतिनिधिमंडल फ्रेंडस कॉलोनी, दिल्ली स्थित उनके निवास पर शोक व्यक्त करने पहुंचा और उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। हरियाणा के उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने भी उनको अपने श्रद्धासुमन भेंट किए।
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राजन नंदा
प्रसिद्ध उद्योगपति केसी लखानी, फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव खेमका, उपाध्यक्ष बीआर भाटिया, शम्मी कपूर, सुनील गुलाटी सहित कई अन्य उद्यमी उनको श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उद्यमी बीआर भाटिया ने बताया कि राजन नंदा के साथ फरीदाबाद उद्योग जगत का गहरा नाता था और उनके जाने से उद्योग जगत को भारी क्षति हुई है।  

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कर्मचारियों ने दी श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला
कर्मचारियों ने दी राजन नंदा को श्रद्धांजलि  
एस्कॉर्ट्स समूह के चेयरमैन राजन नंदा के निधन पर सोमवार को एस्कार्ट्स लिमिटेड प्लांट नंबर एक में कंपनी कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर सरदार गुरमीत सिंह ने कहा कि एस्कॉर्ट्स समूह के चेयरमैन राजन नंदा का इस तरह चले जाना पूरे  समूह खासकर फरीदाबाद के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने कभी नौकर और मालिक में फर्क नहीं समझा और कर्मचारियों और उनके परिवारों की भलाई के लिए कई योजनाएं बनाई। राजकुमार ने कहा कि राजन नंदा एक सफल उद्यमी के साथ-साथ समाजसेवक और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे। इस मौके पर मुख्य रूप से अमरजीत, विजय, दीपक, सुमेर सिंह, मोहर, काक सिंह, राजकुमार, राहुल भाटी, डी. मंगला, कैलाश, सतीश, शिव कुमार मौजूद थे।  
 

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राजन नंदा
एस्कॉर्ट्स ग्रुप ने उद्योगों के लिए फलने फूलने में मदर यूनिट का काम किया
वर्ष 1961 में राजन नंदा के पिता हरप्रसाद नंदा ने फरीदाबाद में एस्कॉर्ट्स कंपनी स्थापित की थी। उनके जाने के बाद राजन नंदा ने ही कंपनी को संभाला। मिलनसार नंदा ने कुछ ही समय में कंपनी को एक ऊंचे मुकाम पर पहुंचा दिया। एस्कॉर्ट्स ग्रुप ने शहर के उद्योग को फलने फूलने के लिए मदर यूनिट का काम किया। 
 
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फाइल फोटो
राजदूत मोटरसाइकिल की लॉचिंग के बाद फरीदाबाद का नाम के देश के कोने-कोने में फैल गया था। राजदूत और यामाहा मोटरसाइकिल के निर्माण ने शहर को ऑटो हब के रूप में पहचान दिलवाई। इनके स्पेयर पार्ट जॉब वर्क पर शहर में बनने लगे। इस तरह से बाबा फरीद की नगरी औद्योगिक नगरी में तब्दील होती चली गई। एस्कॉर्ट्स समूह के बाद कई बड़े उद्योगों ने फरीदाबाद में अपने कदम रखे और इसे औद्योगिक नगरी का दर्जा दिलवाया।  
 
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