आरुषि-हेमराज हत्याकांड को देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बनाने में नोएडा पुलिस की अहम भूमिका है। नोएडा पुलिस ने इस केस की जांच की शुरुआत में ही सबूत जुटाने में ऐसी चूक कर दी, जिसकी भरपाई अब तक नहीं हो सकी है।
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- फोटो : लाल सिंह
16 मई 2008 को आरुषि का शव तलवार दंपति के घर में मिला था। उसी दिन मेट्रो अस्पताल में भर्ती एक बड़े नेता को देखने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता नोएडा आए हुए थे। इनकी सुरक्षा के लिए मेट्रो अस्पताल के आसपास के क्षेत्र को रूट परिवर्तन कर छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
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सुरक्षा को देखते हुए नोएडा पुलिस के सभी बड़े अधिकारी भी मेट्रो अस्पताल में मौजूद थे। ऐसे में आरुषि की हत्या का पता चलने पर तत्कालीन थाना सेक्टर-20 प्रभारी दाताराम नौनेरिया मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने किसी आत्महत्या की तरह इस केस में भी खानापूर्ति करते हुए आरुषि के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
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पहले दिन मौके से न तो खून के नमूने लिए गए और न ही खून से सनी चादर और गद्दों को पुलिस ने सीज किया। यहां तक कि पुलिस को छत पर जाने वाली सीढ़ियों पर गिरी खून की बूंदे तक नहीं दिखीं। पुलिस ने पहले दिन छत पर जाने का कोई प्रयास नहीं किया। जबकि छत के दरवाजे पर ताला लगा था और ताले समेत दरवाजे पर खून से सने हाथों के निशान थे।
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अगले दिन पूर्व डीएसपी केके गौतम छत पर पहुंचे थे और नौकर हेमराज का शव बरामद कराया था। इसके बाद भी नोएडा पुलिस नहीं चेती और घटनास्थल को घेरकर फॉरेंसिक सबूत एकत्र नहीं किए। दोनों दिन फ्लैट में जुटी भीड़ के पैरों और हाथों के निशान में सभी सबूत मिट गए।
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पुलिस के कहने पर ही राजेश तलवार ने बेटी के कमरे से खून से सनी हुई चादर और गद्दे को छत पर रखा था। इसके बाद उन्होंने पुलिस से पूछकर ही खून से लथपथ बेटी के कमरे की पानी डालकर धुलाई कर दी थी। लगभग 15 दिन बाद केस की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम ने फ्लैट से फॉरेंसिक नमूने एकत्र करने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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नोएडा पुलिस भी दो थ्योरी पर कर रही थी जांच आरुषि हत्याकांड में दूसरे दिन 17 मई की सुबह छत पर नौकर हेमराज का शव मिलने के बाद मामला मर्डर मिस्ट्री में बदल गया था। पहले दिन पुलिस ने बिना किसी जांच के जल्दबाजी में लापता नौकर हेमराज को कातिल बता दिया और उसे गिरफ्तार करने के लिए नेपाल स्थित उसके घर पर टीम भी रवाना कर दी गई थी।
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मीडिया में मामला तूल पकड़ने पर पुलिस पर आरोपियों को गिरफ्तार करने का दबाव बढ़ने लगा था। उस वक्त भी पुलिस की अलग-अलग टीमें दो थ्योरी पर जांच कर रही थीं। एक में नौकरों को कातिल माना जा रहा था, दूसरे में तलवार दंपति को कातिल माना जा रहा था। इसके अलावा एक थ्योरी ये भी थी कि कातिल घर के बाहर का कोई तीसरा है।
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- फोटो : अमर उजाला
बेहद दबाव में पुलिस ने 23 मई 2008 को आरुषि के पिता राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया। तत्कालीन आईजी गुरदर्शन सिंह ने इस गिरफ्तारी से एक दिन पहले शाम को तलवार दंपति के घर का निरीक्षण किया था।
31 मई 2008 को सीबीआई के तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के नेतृत्व में जांच करने पहुंची टीम ने पुलिस की थ्योरी को गलत करारा देते हुए नौकरों कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को गिरफ्तार किया था।