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'बारूद' के ढेर पर है क्रिकेट प्रेमियों का प्राइड फिरोजशाह कोटला!

Thu, 19 Nov 2015 06:14 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिरोजशाह कोटला क्रिकेट की स्थापना 1883 में हुई। दिल्ली ने दुनिया को जितने भी दिग्गज क्रिकेटर दिए हैं। उन सभी ने क्रिकेट का ककहरा इसी मैदान से सीखा।
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वीरेंद्र सहवाग की बेखौफ बल्लेबाजी हो या विराट कोहली के विरोधियों पर तीखे तेवर। गौतम गंभीर का तूफानी लेफ्टी बैटिंग स्टाइल हो या आशीष नेहरा का विकेट लेने के बाद जश्न का जोशीला अंदाज, इन्हें उड़ान दिल्ली के दिलवाले क्रिकेट प्रेमियों के सपॉट और फिरोजशाह कोटला ने ही दी है।
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दिल्ली के दंबग खिलाड़ियों ने यहां से सीखे हुनर और 22 गज की पट्टी पर बहाए पसीने की बदौलत ही दुनिया के हर मैदान पर दंबगई दिखाई। इनके रिकॉर्ड न सिर्फ इन खिलाड़ियों के लिए अहम हैं। बल्कि फिरोजशाह कोटला को भी ये रिकॉर्ड गौरवान्वित करते हैं।

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ये सभी खिलाड़ी और इनके कारनामे डीडीसीए को मजबूत बनाते हैं। लेकिन इन सबसे अलग कुछ ऐसा भी है जो डीडीसीए को कटघरे में भी खड़ा करता है। इंटरनेशनल लेवल पर नामी टूर्नामेंट और ऐतिहासिक मैचों की मेजबानी कर करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों के दिल जीतने वाले डीडीसीए पर अब सवाल उठाए जा रहे है और यह विवादों में है।
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प्रशासनिक बॉडी और समीतियों में भी तालमेल नजर नहीं आ रहा है। दिग्गज क्रिकेटर भी इसके भविष्य और मौजूदा हालातों को लेकर चिंतित नजर आते है। शायद यही वजह भी है कि डीडीसीए को अब जहां एक ओर कोर्ट से फटकार लग चुकी है तो दूसरी ओर सरकार रवैया भी सख्त है।
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हालांकि फिरोजशाह कोटला मैदान पर भारत और दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज के चौथे टेस्ट मैच से संकट के बादल छंट चुके हैं। लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट और डीडीसीए में भ्रष्टाचार के मामले के चलते अभी डीडीसीए की राह आसान नहीं है।
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डीडीसीए विवाद को लेकर दिल्ली रणजी टीम के कप्तान गौतम गंभीर और पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मिल चुके हैं।

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इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कानूनी दांवपेच और वित्तीय अनियमितताओं के अलावा डीडीसीए में विवाद का दूसरा पक्ष भी हो सकता है। जानकारी के मुताबिक डीडीसीए पर दिल्ली सरकार का करोड़ों का टैक्स बाकी है और डीडीसीए इसकी भुगतान में आनाकानी कर रहा है।

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पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने दावा किया था कि डीडीसीए इंटरनेशनल मैचों की मेजबानी करने की हालत में नहीं है क्योंकि संस्था सर से पांव तक भ्रष्टाचार में डूबी है। वहीं कीर्ति आजाद ने भी इसे भ्रष्टाचार की मांद करार दिया है।

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डीडीसीए के ये हालात तब हैं जबकि इसकी प्रशासनिक बॉडी में हमेशा ही सरकार में दखल रखने वाले दिग्गज नेता शामिल रहे हैं। हालांकि इन नेताओं की डीडीसीए में भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। डीडीसीए के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी इसमें आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में डीडीसीए में भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई। वे सत्ता में रहना चाहते थे।

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ऐसे में अब इस संस्था और दिल्ली के लोगों के गौरव को बचाने के लिए पूर्व दिग्गज क्रिकेटर आगे आ रहे हैं। उनका कहना है कि वे इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहते बल्कि संस्था की प्रशासनिक सफाई चाहते हैं ताकि दिल्ली वालों को फायदा हो।

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सीएम ने भी इस मामले में तत्परता दिखाई और जांच कमेटी गठित कर जल्द से जल्द रिपोर्ट मांगी गई। जिसमें डीडीसीए को निलंबित करने की सिफारिश की गई है। पूर्व खिलाडियों और डीडीसीए के ही कुछ अधिकारियों के मुताबिक फिरोजशाह कोटला स्टेडियम बारूद के ढेर पर खड़ा है। पुरानी दिल्ली से कोटला के नजदीक से सीवर लाइन गुजर रही है।
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इससे प्रमुख सीवर लाइन को नुकसान हुआ है। जिसमें मेथेन गैस है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी माना है कि गैरकानूनी सीवर लाइन से पूरे स्टेडियम को खतरा है। इतना ही नहीं डीडीसीए और कोटला की इन हालातों से आईसीसी भी परिचित हो चुका है। ऐसे में देखना होगा कि सरकार, कोर्ट, आईसीसी, बीसीसीआई और पूर्व खिलाड़ियों के दबाव के बावजूद डीडीसीए कहां पहुंचता है।
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