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Weather Forecast: तो इस वजह से नहीं हो रही दिल्ली-एनसीआर बारिश, अब करना होगा चार दिन का लंबा इंतजार

Sun, 10 Jul 2022 09:47 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्मी ने तरेरी आंखें - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली-एनसीआर में बीते 30 जून को मानसून ने झमाझम बारिश के साथ दस्तक दे दी थी। लेकिन, इसके बाद से लगातार मानसून दिल्ली-एनसीआर से रूठा हुआ है। इस बीच मौसम विभाग के पूर्वानुमान भी बार-बार फेल हो रहे हैं। नतीजन, बीते 10 दिनों से लोग उमस भरी गर्मी में बारिश को तरस रहे हैं। वहीं, मौसम विशेषज्ञों ने इसके पीछे उड़ीसा में बन रहे निम्न दबाव वाले क्षेत्र को जिम्मेदार बताया है। 
 
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दिल्ली में पड़ रही गर्मी - फोटो : अमर उजाला
बीते 10 दिनों में सिर्फ 2.6 मिमी बारिश
दिल्ली के आधिकारिक मानक केंद्र सफदरजंग पर बीते 10 दिनों में सिर्फ 2.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। एक जून से मानसून का मौसम शुरू होने के बाद से 126.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर 144.3 मिमी बारिश का रिकॉर्ड है। हालांकि, दर्ज बारिश में से 117.2 मिमी महज 24 घंटे में एक जुलाई को सुबह साढ़े आठ बजे तक दर्ज की गई थी। इसके बाद मौसम विभाग ने एक जुलाई से ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी, लेकिन बारिश दर्ज नहीं हई। 
 
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गर्मी से परेशान युवतियां - फोटो : अमर उजाला
मौसम विभाग ने अगले छह दिनों में हल्की बारिश के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन एक जुलाई से लेकर तीन जुलाई तक सिर्फ दो मिमी बारिश दर्ज हुई थी। वहीं, मौसम विभाग ने चार व पांच जुलाई के लिए यलो अलर्ट और छह जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया, जिसे बाद में बढ़ाकर सात जुलाई कर दिया गया, जबकि दिल्ली-एनसीआर के लोग बारिश का इंतजार करते हुए तरस गए। इसके बाद नौ व 10 जुलाई के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन बारिश के लिए लोगों का इंतजार बना रहा। 

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दिल्ली में गर्मी - फोटो : amar ujala
मध्य भारत की ओर बनी ट्रफ शुष्क मौसम के लिए जिम्मेदार
दिल्ली-एनसीआर में शुष्क मौसम के लिए विशेषज्ञों ने मानसून की ट्रफ का मध्य भारत की ओर बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जो ओडिशा पर एक कम दबाव क्षेत्र बनने के बाद में गुजरात की तरफ बढ़ गई। स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि कम दबाव के क्षेत्र ने ट्रफ रेखा को मध्य भारत की ओर खींच लिया था, जिससे वहां भारी बारिश दर्ज हुई। हालांकि, यह उम्मीद की जा रही थी कि कम दबाव का क्षेत्र खत्म होने के बाद मानसून की ट्रफ का पश्चिमी छोर फिर से उत्तर की ओर बढ़ जाएगा। लेकिन, पिछले 24 घंटों में दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और दक्षिण पाकिस्तान के आसपास के हिस्सों में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बनने से मानसून की ट्रफ दिल्ली और आसपास के इलाकों के पास नहीं आई। यह अभी भी दिल्ली के दक्षिण में अटका गई है और बीकानेर व कोटा से होकर गुजर रही है। पलावत ने कहा कि हवाओं के दिशाओं के कारण हरियाणा और पंजाब में बारिश दर्ज की गई है। इसके लिए ऊपरी स्तर पर पश्चिमी हवाएं और निचले स्तर में पूर्वी हवाएं जिम्मेदार रही हैं।
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दिल्ली-एनसीआर में गर्मी का कहर - फोटो : amar ujala
अगले दो दिनों में भी नहीं होगी बारिश
मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने कहा कि दिल्ली में सोमवार और मंगलवार को भी बारिश के आसार नहीं हैं। आगामी 13 और 14 जुलाई को कम दबाव का क्षेत्र गुजरात को पार करने और मॉनसून की ट्रफ उत्तर की ओर बढ़ने के बाद बारिश की संभावना है, जिससे दिल्ली-एनसीआर वासियों को कुछ राहत मिल सकती है। अगले सप्ताह में अच्छी बारिश को लेकर उम्मीद की जा सकती है। दिल्ली में बारिश के बारे में मौसम विभाग द्वारा बार-बार गलत होने वाले पूर्वानुमान पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव माधवन नायर राजीवन ने कहा कि पूर्वानुमान का एक बार गलत होना ठीक है, लेकिन ऐसा अक्सर नहीं होना चाहिए। पीला, लाल, नारंगी अलर्ट तब जारी किया जाता है, जब आप वास्तव में किसी ऐसी चीज के बारे में आश्वस्त होते हैं, जो लोगों को प्रभावित करने वाली है। अलर्ट जारी करने से पहले आपके पास अच्छी जानकारी होती है। समय के साथ काफी सुधार हुआ है। हमें कम से कम दो या तीन दिन पहले एक अच्छा पूर्वानुमान लगाने में सक्षम होना चाहिए। राजीवन ने कहा कि स्थानीय मौसम पूर्वानुमान जटिल हो गए हैं, क्योंकि मॉडल प्रदूषण, एरोसोल और भूमि उपयोग में बदलाव के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
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