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दिल्ली हिंसा: अस्पताल में अब तक पड़ा है एक पैर, एक गर्दन और थैले भर हड्डियां, नहीं हो पाई पहचान

Tue, 03 Mar 2020 11:47 AM IST
प्राची प्रियम परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो)) - फोटो : पीटीआई
पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में दिल दहला देने वाली हालत में कई शव अपने परिजनों के इंतजार में पड़े हुए हैं। एक पैर, एक गर्दन और थैले में भरी हड्डियां मोर्चरी में रखी हैं। डॉक्टरों के अनुसार, थैले में जिस शख्स की हड्डियां हैं, उसकी पहचान मोसीन के रूप में हुई है, जबकि पैर और गर्दन किसकी है, इसके बारे में उन्हें अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। 

 
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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो)) - फोटो : अमर उजाला
हालांकि अस्पताल के फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने दोनों का सैंपल सुरक्षित रख लिया है, ताकि डीएनए जांच के जरिये ये पता लगाया जा सके कि पैर और गर्दन किसकी है। यही नहीं इन दोनों अंगों की स्थिति अब बिगड़ने लगी है। अगले तीन दिन तक ही इन्हें मोर्चरी में रखा जा सकता है। अगर इस बीच भी कोई परिजन इनकी शिनाख्त के लिए नहीं पहुंचे, तो डॉक्टरों के पास डिस्पोज करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होगा।
 
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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि मोर्चरी में एक पैर और एक गर्दन के अलावा दिल्ली पुलिस एक थैले में हड्डियां लाई थी। हड्डियां देखकर हर कोई अचंभित रह गया। पुलिस की मदद से शव की शिनाख्त तो कर दी गई है, लेकिन पोस्टमार्टम मंगलवार को हो सकेगा। अब फोरेंसिक विशेषज्ञों के आगे सबसे बड़ी चुनौती है कि आखिर ऐसा कौन सा हथियार या रसायन इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से मौसीन की ये दशा हो गई।
 

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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो) - फोटो : रॉयटर्स न्यूज एजेंसी
उधर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) की मोर्चरी में भी पांच शवों का पोस्टमॉर्टम होना बाकी है। पांच में से एक शव की शिनाख्त सोमवार को हो चुकी है, जिसका नाम आफताब है। बाकी चार शवों की पहचान अभी भी नहीं हुई है। पहचान के बाद ही पोस्टमार्टम हो सकेगा। 

 
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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
आरएमएल अस्पताल के एक वरिष्ठ फॉरेंसिक डॉक्टर ने बताया कि जीटीबी अस्पताल में ज्यादा शव होने के कारण वहां के अस्पताल प्रबंधन से अपील की गई थी, जिसके बाद बीते दो दिनों में बरामद शवों को पुलिस आरएमएल लेकर आई। चूंकि अभी तक शवों की शिनाख्त नहीं हुई और वीडियोग्राफी भी होनी है, इसलिए मंगलवार को जिनकी भी शिनाख्त हो जाएगी, उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा। 
 
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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
जीटीबी अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि मोर्चरी में जो दो अंग हैं, उनमें से एक गर्दन शाहबाज की हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि डीएनए जांच पूरी होने के बाद ही संभव है। शाहबाज हिंसा के दिन से लापता है। मंगलवार को उसके परिजन जीटीबी आकर अपना सैंपल देंगे, जिनके आधार पर डीएनए जांच की जा सकेगी। 
 
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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फॉरेंसिक विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि दिल्ली हिंसा को लेकर शुरुआत से ही पूरा विभाग इसकी निगरानी रख रहा है। हालांकि एम्स में कोई भी शव पोस्टमार्टम के लिए नहीं आया, लेकिन विभाग पूरी तरह तैयार है। 
 
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अस्पतालों के बाहर अपनों के शव मिलने का इंतजार करते लोग(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
फोरेंसिक साइंस के इतिहास में दिल्ली की हिंसा एक गंभीर अपराध के रूप में दर्ज हुई है। इस हिंसा में जिस तरह की मौतें देखने को मिली हैं उनसे अपराध की गंभीरता और उपद्रवियों की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। 
 
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