पैर पर घाव और उसमें रेंगते कीड़े। कोहनी पर गहरा घाव इतना कि अंदर की हड्डी भी साफ दिखाई दे रही है। मक्खी, कीड़े और पसीने के चलते असहनीय दर्द। रविवार को नई दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के बाहर बस स्टाप पर बैठा वह शख्स अस्पताल में ही भर्ती था लेकिन बेघर होने के चलते इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं था। शायद इसीलिए डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी वार्ड से बाहर कर दिया। शरीर पर न कपड़ा और न पट्टी। बस कपड़े के नाम पर अस्पताल की एक खुली हुई एप्रेन, जिसमें शख्स बार बार कभी अपने जख्म तो कभी अपना नग्न शरीर को छिपाने की कोशिश कर रहा था।
लेकिन कहते हैं न कि जिसका कोई नहीं होता भगवान खुद किसी न किसी रूप में उसकी मदद के लिए आते हैं। शायद इस मरीज के लिए द अर्थ सेवियर्स फाउंडेशन भगवान बनकर ही आया जो उसे अपने साथ अस्पताल ले गया। सोमवार से फाउंडेशन के ही अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। पढ़ें इस मरीज की दर्दनाक दास्तां और दिल्ली के एक बड़े सरकारी अस्पताल की अमानवीय हरकत...