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Delhi Fire: किसी की सूनी हुई गोद तो किसी का उजड़ा सुहाग, परिजन बने जिंदा लाश, इनके दर्द को सुनने के लिए कलेजा चाहिए

Sun, 15 May 2022 04:54 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
मुंडका इलाके की घटना ने कई लोगों को अपनों को हमेशा के लिए जुदा कर दिया है। कई परिजन अभी भी अपनों की तलाश में भटक रहे हैं। इस कड़ी में एक जोड़ा ऐसा भी है, जिनकी शादी पांच महीने बाद होने वाली थी, लेकिन अनहोनी ने मंगेतर को बंधन में बंधने से पहले ही अलग कर दिया। 

अमन और दृष्टि की बीते वर्ष मार्च में सगाई हुई थी और इस साल नवंबर में शादी होने वाली थी। दृष्टि बीते दो सालों से इमारत में काम कर रही थीं व अमन लुधियाना में मोबाइल की दुकान में काम करते हैं। 12वीं कक्षा तक पढ़ी दृष्टि शुरुआत से ही परिवार की जिम्मेदारी को लेकर सजग थी। यही वजह है कि पिता का साया उठने के बाद दो भाइयों के साथ घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए काम करती थीं। 

अमन के परिजनों ने बताया कि शादी को लेकर तैयारियां चल रही थीं, लेकिन किसी को नहीं पता था कि अमन का घर बसने से पहले ही उजड़ जाएगा। परिजनों ने बताया कि शव इतने बुरी तरह जल गए हैं कि पहचान में नहीं आ रहे हैं। दृष्टि के हाथ में पहनी हुई अंगूठी और सफेद पैंट से मृतक की पहचान हो सकी। घटना के बाद से अमन का रो-रोकर बुरा हाल है, वह इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं कि आग ने दृष्टि को उनसे छीन लिया है। 
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
बेटे का नहीं मिल रहा पता, मां का रो-रोकर बुरा हाल
अपने बेटे की तलाश में राजरानी अन्य पीड़ित परिवार की तरह गुम-सुम नजर आई। अस्पताल का एक कोना पकड़कर बैठी मां अपने बेटे से मिलने के लिए बार-बार रोती हुई नजर आई। राजरानी ने कहा कि बेटा नरेंद्र दो सालों से फैक्टरी में सीसीटीवी कैमरा पैक करने का काम करता था। बेटे ने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा था, लेकिन इसके बाद भी बेटे का कुछ पता नहीं चल रहा है। डॉक्टर कह रहे हैं कि डीएनए जांच के बाद ही शवों का शिनाख्त हो सकेगी।

 
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
इकलौती कमाने वाली थी निशा
निशा की माता शनिवार को दिन भर रोते बिलखते हुए अपने बेटी की तस्वीर लिए इधर-उधर भटकती हुई नजर आई। माता मीरा देवी ने बताया कि छह बेटियों व एक बेटे में निशा इकलौती कमाने वाली बेटी थी। आठ घंटे की नौकरी कर घर का खर्च चलाती थी और परिवार की जरूरतें पूरा करती थी। इमारत की आग ने मेरी बेटी को मुझसे अलग कर दिया है। न ही डॉक्टर कुछ बता रहे हैं और न ही पुलिस कुछ कह रही है।

 

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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
इमारत से कूद गई थी मेरी बेटी, लेकिन अभी तक कुछ पता नहीं
बिहार के पटना से पहुंची मां सिल्लु देवी भी रोते हुए अपनी बेटी स्वीटी को ढूंढते हुए दिल्ली के अस्पतालों में धक्के खाते हुए संजय गांधी अस्पताल की मोर्चरी में पहुंची। लेकिन, उन्हें उनकी बेटी का कुछ पता नहीं चला। सिल्लु देवी ने कहा कि उसकी सहेली इमारत का शीशा तोड़कर कूद गई थी, जिसके बाद स्वीटी को कूदने के लिए कहा। बेटी हिम्मत करने के बाद इमारत से कूद गई थी और कमर की चोट से घायल हो गई थी। घटना की सूचना मिलते ही बिहार से दिल्ली पहुंची हूं, लेकिन अब यहां बेटी को लेकर कोई भी जानकारी नहीं दे रहा है। नेता व अधिकारी एक दूसरे पर जवाबदेही बना रहे हैं। सिल्लु देवी ने अस्पताल पहुंचे सांसद हंसराज हंस के आगे गिड़गिड़ाकर बेटी की भी गुहार भी लगाई। 

 
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
शादी की सालगिरह पर दिया था कड़ा, शिनाख्त में मिली मदद
इमारत में बीते 10 वर्षों से मोहिनी भी काम करती थी। वर्तमान में वह सेल्स मैनेजर के तौर पर काम कर रही थीं। मोहिनी के पड़ोसी अकाश ने बताया कि मोहिनी के पति विजय पाल एक निजी एयरलाइंस में इलेक्ट्रीशियन के तौर पर कार्यरत हैं। विजय ने हाल ही में शादी की सालगिरह पर पत्नी को कड़ा दिया था। इसी के आधार पर मोर्चरी में शव की पहचान हो सकी। घटना के बाद से पति विजय स्तब्ध है। 
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
अपनी मां को लेने गया था ओडिसा, यहां खो दी अपने बच्चों की मां
अकबर बीते दिनों ही अपनी मां को लेने ओडिसा गया था, लेकिन उसे नहीं पता था कि वह इस बीच अपनी पत्नी और अपने बच्चों की मां को खो देगा। मुशर्रत बीते एक साल से फैक्ट्री में कैमरे पैक करने का काम करती थी। परिवार में पति, सांस और तीन बच्चे हैं। अकबर ने बताया कि अफ्सा(11), जीनत(5) और फरदीन(ढाई) का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे अपनी मां को याद कर पुकार रहे हैं, लेकिन पत्नी का पता नहीं मिल रहा है। अस्पतालों के आपातकालीन विभाग से लेकर मोर्चरी के चक्कर लगा लिए, लेकिन मेरी पत्नी की जानकारी किसी के पास नहीं है। 
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
मेरी बहन को बृहस्पितवार को ही मिला था पहला वेतन 
अजीत तिवारी ने बताया कि उनकी बहन मोनिका(21) को बीते बृहस्पतिवार को ही पहला वेतन मिला था। हमें शाम पांच बजे जानकारी मिली की इमारत में आग लग गई है, लेकिन यह नहीं पता था कि आग मोनिका वाली इमारत में लगी है। जब बहन शाम सात बजे तक नहीं लौटी तो परिवार ने तलाश शुरू की, लेकिन अभी तक कुछ पता नहीं चला। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा निवासी मोनिका अपने दो भाइयों के साथ अगर नगर इलाके में रहती थी।
 

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मेरी बेटी पूजा को मुझसे मिला दो
मोर्चरी के पास रो रही मां अपनी बेटी पूजा को तलाश करती दिखी। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी इमारत में सीसीटीवी पैक करने का काम करती थी। घटना की जानकारी रात नौ बजे मिली, जिसके बाद अस्पताल की मोर्चरी में ही हूं। मेरी बेटी के आंख के नीचे कट का निशान है, लेकिन अभी तक कोई भी मेरी बेटी के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं दे रहा है। वह घर में अकेली कमाने वाली थी।
 
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कांच तोड़कर बचाई जान
घटना के वक्त इमारत में मौजूद अंकित ने कहा कि जिस समय आग लगी उस समय इमारत में मोटिवेशनल सत्र चल रहा था। इस बीच शोर मचने के साथ लोग आग-आग चिल्लाते हुए भाग रहे थे। मैंने कांच तोड़कर इमारत से कूदकर अपनी जान बचाई।
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