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दिल्ली की नई सनसनी अदिति बनीं ब्रिटेन की फुटबॉलर ऑफ द ईयर

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दिल्ली की लड़की ने ऐसा काम किया है कि उसने इंगलैंड को चौंकाकर बेगानों के बीच में अपनी पहचान बनाई है। मुश्किल से तीन महीने हुए हैं जब अदिति पहली भारतीय बनी जिसने एफए वीमेंस प्रीमियर लीग इंगलैंड में अपनी जगह बनाई थी।
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दिल्ली की नई सनसनी अदिति बनीं ब्रिटेन की फुटबॉलर ऑफ द ईयर

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जब अदिति ने वेस्ट हैम लेडीज की टीम के ‌साइन किया था तब किसी ने नहीं सोचा था कि ये 23 साल की गोलकीपर वुमन फुटबॉलर ऑफ द ईयर का खिताब अपने नाम कर लेगी। यह पुरस्कार उसे लंदन में हुए तीसरे एशियन फुटबॉल अवार्ड्स में दिया गया।
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अदिति को इससे अच्छा जन्मदिन का तोहफा क्या मिल सकता था जो शुक्रवार को ही था। अदिति ने ये अवार्ड कुछ भारतीय खिलाड़ियों को ही पछाड़कर ही जीता है। जिसमें तन्वी हंस, मोनिका शर्मा और सबाह महमूद शामिल हैं।

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अदिति ने अपनी पढ़ाई जीसस एंड मैरी कॉलेज और एमिटी इंटरनेशनल स्कूल से की है। अदिति भारत के लिए आखिरी बार इंचियोन एशियन गेम्स में खेली थी जो पिछले साल संपन्न हुए थे।
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अदिति देश की पहली महिला फुटबॉलर है जिसे इतना बड़ा सम्मान मिला है। अदिति कहती है कि पिछले कुछ महीने से जो कुछ हो रहा है वो सब सच निकला। मेरा ये जन्मदिन अब तक का सबसे खास जन्मदिन रहेगा।
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अदिति को जिस समारोह में सम्मानित किया गया वो वेम्बले स्टेडियम में आयोजित हुआ था। इन अवार्ड्स को सपोर्ट करने वालों में इंग्लिश फुटबॉल एसोसिएश और एशियन फुटबॉल प्रोजेक्ट है जिससे इंग्लिश फुटबॉल में योगदान देने वाले ब्रिटिश ‌एशियाईयों को पहचान मिल सके।
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अदिति के अलावा जिन लोगों ने अवार्ड ‌जीते उनमें प्रमुख हैं वेल्स और स्वानसी फुलबैक नील टेलर जिनमें एक अंग्रेज पिता है और दूसरी भारत की मां। इन दोनों ने एशियन फुटबॉलर ऑफ द ईयर का खिताब जीता।

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वहीं एश्टन विला के 17 साल के ईसा सुलिमान जो डिफेंडर के रूप में खेलते हैं और पाकिस्तानी मूल के हैं एवं अंडर 17 टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं ने युवा खिलाड़ी का खिताब जीता।

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टीम किडरमिंस्टर हैरियर्स के स्ट्राइकर गुरजीत सिंह ने नॉन-लीग प्लेयर गॉन्ग का अवार्ड जीता।

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अदिति शुरू से ही अवार्ड जीतने के लिए सबकी पसंदीदा थीं और उनका यूनाईटेड किंगडम से कोई नाता भी नहीं था। जब वो दो साल स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की पढ़ाई करने आई थीं तो वो वार्सिटी टीम के लिए खेलती थीं और तब ही उन्हें वेस्ट हैम की गोलकीपिंग कोच जुलियन ने देखा और समझ गई कि अदिति में कुछ खास है।

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अदिति ने बताया कि अवार्ड जीतने से पहले उन्हें बड़ी उम्मीदें थीं और वो सकारात्मक भी थीं कि उन्हें अवार्ड मिल जाएगा। लेकिन अब जब वो सच में जीत चुकी हैं तो ये एक सपने जैसा है। वो कहती हैं कि आप भारत से आने के बाद इतने बड़े अवार्ड के बारे में सोच भी नहीं सकते।

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अदिति कहती हैं कि अब उनके काफी अच्छा अनुभव हो रहा है। उनके लिए ये सब परियों की कहानियों की तरह है क्योंकि वो एक ऐसे देश से आई हैं जहां महिला फुटबॉल की के बारे में कोई सोचता भी नहीं है।

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अदिति ने कहा कि उनका सफर इतना आसान नहीं रहा है। फुटबॉल में करियर बनाना काफी मुश्किल रहा। वो अपने अवार्ड के लिए अपने परिवार को श्रेय देती हैं क्योंकि उन्होंने अदिति का हर बुरे वक्त में सपोर्ट किया।

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जब उनसे पूछा गया कि आगे उनके क्या प्लान हैं तो वो कहती हैं कि हालांक‌ि वो अपने वीजा को लेकर परेशान चल रही हैं लेकिन अब वो अपने कदम वापस नहीं लेंगी और फुटबॉल खेलती रहेंगी क्योंकि फुटबॉल ने उन्हें बहुत कुछ दिया है।
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अदिति की मां अपनी बेटी की कामयाबी पर कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो खेल जिसमें पुरूषों का वर्चस्व माना जाता है उस खेल में उनकी बेटी ये मकाम हासिल करेगी।
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