दिल्ली के वेलकम जनता कॉलोनी में जमींदोज हुई चार मंजिला इमारत ने पड़ोसियों को भी बेघर कर दिया है। रात बिताने के लिए अब कोई ठिकाना नहीं है। वर्षों की मेहनत की कमाई से बनाया गया मकान टूटकर मलबे में तब्दील हो चुकी है।
पूर्वी दिल्ली के वेलकम जनता कॉलोनी में जमींदोज हुई चार मंजिला इमारत ने अपने साथ पड़ोसियों के मकानों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। दीपा (56), गोबिंद (60) और अताउर रहमान (35) बेघर हो गए। पड़ोसी हादसे के बाद से भूखे-प्यासे कभी राहत कार्य तो कभी अपने क्षतिग्रस्त मकान को बेबस नजरों से देखकर भावुक हो रहे थे। घर का सारा सामान मलबे में दब गया। भूखे-प्यासे और बेघर इन लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था पड़ोसी दुकानदारों और अगल-बगल के लोगों ने की। भावुक इन लोगों के गले से किसी तरह निवाला उतरा।
रात बिताने के लिए अब कोई ठिकाना नहीं है। वर्षों की मेहनत की कमाई से बनाया गया मकान टूटकर मलबे में तब्दील हो चुकी है।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : पीटीआई
पुलिस के अनुसार, गोविंद अपनी पत्नी दीपा (56), बेटी ज्योति (27) और दामाद रवि कश्यप (27) के साथ इस मकान में रहते थे। गोविंद पास के बाजार में सब्जी बेचने का काम करते हैं और इसमें उनका परिवार सहयोग करता है। गोविंद के दामाद ने बताया कि वह अपने ससुर के साथ सब्जियों की पैकेजिंग का काम करता है। अचानक इस हादसे ने सब कुछ छीन लिया।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : पीटीआई
अताउर रहमान ने बताया कि सुबह करीब सात बजे नींद में था तभी लगा भूकंप आया। नींद खुली तो देखा मकान के एक हिस्से की दिवार गिर गई है। सामने वाले मकान में उनके पड़ोसी जख्मी पड़े हैं। उसने तुरंत घायलों को बाहर निकालने में मदद की। रहमान ने कहा कि परिवार में छह लोग हैं ,जिनके पालन-पोषण के लिए दिहाड़ी पर मजदूरी करता हूं। मकान टूटने से अधिक नुकसान हुआ है। राहत इस बात की है कि अल्लाह ने जान बचा ली।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : पीटीआई
मृतकों को 10-10 लाख मुआवजा दें सरकार : कांग्रेस
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने मांग रखी कि सीलमपुर में मरने वालों के परिजनों को सरकार 10-10 लाख रुपये मुआवजा और घायलों को 2-2 लाख रुपए देने की घोषणा करे। आजाद मार्केट में इमारत ढहने के हादसे के बाद मेट्रो के तरफ से मृतक मनोज के परिजनों को 5 लाख मुआवजे की घोषणा करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को दिल्ली के गरीब लोगों की कोई चिंता नही है, सिर्फ अपने प्रचार प्रसार में लगी है। उन्होंने कहा कि 19 अप्रैल को मुस्तफाबाद में चार मंजिला ढहने से 11 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आज तक कोई ठोस कार्रवाई नही हुई है।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : पीटीआई
मदद करने पहुंचे आप कार्यकर्ता, जताया दुख
सीलमपुर में चार मंजिला इमारत गिरने के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता मदद के लिए पहुंचे। घटना के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी समेत अन्य नेताओं ने इस घटना पर दुख जताते हुए आप कार्यकर्ताओं को मदद करने की अपील की। केजरीवाल ने कहा कि गली संकरी होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आईं।
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दिल्ली में मकान गिरा
- फोटो : एएनआई
बचाव दल के छूटे पसीने...
बेहद तंग करीब 4 फीट चौड़ी गली में राहत एवं बचाव कार्य में रेस्क्यू टीम के पसीने छूट गए। शुरुआत में दो शव पौने 11 बजे निकाले गए। कई घंटों की मशक्कत के बाद मलबा हटाकर जूबिया, फौजिया, जावेद और अब्दुल्लाह के शव निकाले जा सके।
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दिल्ली में मकान गिरा, अब्दुल मतलूब का फाइल फोटो
- फोटो : एएनआई/अमर उजाला
चार मंजिला इमारत ढही, एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम इलाके की जनता कॉलोनी में शनिवार सुबह चार मंजिला इमारत भरभराकर गिर जाने से दो साल की मासूम सहित एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हैं। हादसे के समय वहां दस लोग मौजूद थे। इमारत के मलबे की चपेट में आकर तीन अन्य मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। दिल्ली सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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अब्दुल मतलूब, पत्नी राबिया, बेटे जावेद और अब्दुल्लाह के साथ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह इमारत गिरने से भीषण आवाज हुई, जिसे सुनकर लोग मौके पर पहुंचे। मलबे से एक मासूम समेत चार लोगों और पड़ोस के एक अन्य मकान से चार अन्य को निकालकर अस्पताल भेजा गया। पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं। महज चार फीट चौड़ी गली, मकानों के छज्जे मिले होने और बिजली के तारों की वजह से राहत एवं बचाव कार्य में खासी परेशानी आई। लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर मलबा हटाने का प्रयास किया।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
आसपास के मकान खाली कराए
राहत कार्य करने में बचाव दल के पसीने छूट गए। मलबा हटाते समय पड़ोसियों के घरों की दीवारें भी हिल रही थीं। इसे देखते हए पलिस व बचाव दल ने आसपास के आठ मकानों को खाली करवाया। इसके बाद मलबा हटाने काम शरू हआ। लोगों ने बताया कि रोज सुबह 9 बजे बच्चे आंगनबाड़ी में पढ़ने आते थे। अगर दो घंटे बाद हादसा होता तो कई और जानें जा सकती थीं। शाहदरा एसडीएम कपन झा ने बताया कि मलबा छोटे ट्रैक्टर की मदद से लाकर चौक पर उसका ढेर लगाया जा रहा है। बाद में बड़े ट्रकों की मदद से इसे हटा दिया जाएगा।
भूतल पर था आंगनबाड़ी केंद्र
35 गज में बनी चार मंजिला इमारत के भूतल पर आंगनबाड़ी केंद्र था। ऊपर की मंजिल पर यूपी के बिजनौर निवासी अब्दुल मतलूब, पत्नी राबिया, चार बेटों परवेज, जावेद, नावेद, अब्दुल्लाह उर्फ भूरा, बहू शीजा, पोते अहमद, बेटी जूबिया और दो साल की नवासी फौजिया के साथ रहते थे। अब्दुल, राबिया, जावेद, जूबिया, अब्दुल्लाह, फौजिया की मौत हो गई।