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दिल्ली: लहूलुहान पत्नी की मदद के लिए चिल्लाते रहा पति, तमाशबीन बने रहे लोग, कोई नहीं आया आगे

Sun, 22 Sep 2019 10:13 AM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मृतिका उषा और घटनास्थल - फोटो : अमर उजाला
शनिवार सुबह करीब सवा छह बजे मधुविहार स्थित शनि मंदिर में दर्शन कर रहे कैलाश चंद गुप्ता ने अचानक गोली चलने की आवाज सुनी तो भाग कर बाहर आए। अपनी कार के बाहर जमा भीड़ को देख कर कैलाश की धड़कने तेज हो गईं। भीड़ के बीच से रास्ता बनाते हुए कैलाश गाड़ी के पास पहुंचे तो पत्नी ऊषा को चालक सीट पर खून से लथपथ पड़ा देखकर उनके होश उड़ गए।
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घर में पसरा मातम - फोटो : अमर उजाला
कैलाश ने चिल्लाते हुए लोगों से ऊषा को अस्पताल ले जाने में मदद करने के लिए गुहार लगाई, लेकिन कोई शख्स आगे नहीं आया। लोगों का कहना था कि यह पुलिस केस है। किसी से मदद न मिलने पर कैलाश ने खुद ही पुलिस को फोन कर मामले की जानकारी दी। इस बीच सड़क पर आने जाने वाले सैकड़ों लोग अपनी गाड़ी रोक कर तमाशा देखते रहे। कैलाश खून में सनी पत्नी के साथ अकेले कराहते रहे, लेकिन किसी ने मानवता के नाते भी मदद का हाथ बढ़ाने की कोशिश नहीं की। 
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मौके पर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
कॉल करने के करीब 15 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ऊषा को अस्पताल ले गई, लेकिन तबतक उनकी मौत हो चुकी थी। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर ऊषा को अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। पत्नी की मौत की वजह से बीमार कैलाश का भी डायलिसिस नहीं हो पाया।

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सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई घटना - फोटो : अमर उजाला
ऊषा के भाई नवनीत गोयल ने बताया कि उसके जीजा कैलाश को रिटायरमेंट के बाद से ही गुर्दे की बीमारी हो गई थी, जिसकी वजह से उनका सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस होता है। इसके लिए सुबह सात बजे अस्पताल पहुंचना होता था। बेटा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। उसके कॉलेज जाने की वजह से ऊषा ही पति को लेकर अस्पताल जाती थीं।
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घटना की सूचना मिलते ही मोहल्ले में पसरा मातम - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा दोनों लोग रोजाना सुबह स्वास्थ्य विहार में ब्रह्मकुमारी आश्रम में योग करने के लिए जाते थे। परिवार समझ नहीं पा रहा है कि ऊषा की हत्या किसने और क्यों की। परिवार वालों के अनुसार उषा का व्यवहार ऐसा था कि वह सबकी मदद के लिए तैयार रहती थीं। 
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परिवार के साथ ऊषा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
एक रिश्तेदार ने बताया कि अभी कुछ दिनों पहले एक गरीब महिला कांति देवी को इंश्योरेंस के पैसे नहीं मिल रहे थे। ऊषा ने काफी मशक्कत के बाद उस महिला के बीमा के साढ़े तीन लाख रुपये उसे दिलवाए थे। वहीं पड़ोसी राकेश सेठी ने बताया कि ऊषा बेहद मिलनसार थीं। कभी उन्होंने किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं की। वह हर पड़ोसी के सुख-दुख में खड़ी रहती थीं। ऊषा की मौत के बाद पूरे मोहल्ले में शोक का माहौल है। परिजनों का भी रोते-रोते बुरा हाल है। 
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