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कारगिल विजय दिवसः गोला-बारूद खत्म हो गए ...फिर भी लड़ते रहे कैप्टन हनीफुद्दीन

Mon, 26 Jul 2021 08:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मिस्टर शिवाजी का खिताब जीतने वाले जंग-ए-मैदान में भी वीर शिवाजी की तरह लड़े
  • साल 1997 में 7 जून को मिला कमीशन, 1999 में 7 जून को ही मिली शहादत
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हनीफुद्दीन - फोटो : अमर उजाला
पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार के हनीफ बचपन से ही होनहार थे। 7 साल की उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ गया, पर मां हेमा अजीज ने कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। दिल्ली के शिवाजी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई के दौरान अपनी बहुआयामी प्रतिभा के कारण हनीफुद्दीन ने मिस्टर शिवाजी का खिताब अपने नाम किया। 7 जून 1997 को भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया और इसके ठीक 2 साल बाद 7 जून 1999 को कारगिल के तुरतुक सेक्टर में वीर शिवाजी की ही भांति दुश्मनों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
 
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शहीद कैप्टन हनीफ - फोटो : अमर उजाला
शहीद कैप्टन हनीफ के छोटे भाई व पेशे से शिक्षक नफीस लगभग 20 साल पुराने उस पल को याद करके खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। नफीस बताते हैं कि हनीफ बेहद जोशीले और दिलकश इंसान थे। यदि वह सेना में नहीं होते तो बड़े संगीतकार होते। मां हेमा अजीज हिंदुस्तानी क्लासिकल सिंगर हैं। इसका असर हनीफ पर भी पड़ा था। राजपूताना राइफल में तैनात होने के दौरान उन्होंने एक जॉज बैंड बनाया था। कारगिल की वीरान वादियों में अपने साथी सिपाहियों को गाने गाकर सुनाया करते थे। 
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करगिल युद्ध - फोटो : social media
नफीस ने बताया कि नानी स्वतंत्रता सेनानी थीं। हनीफ अपनी नानी से बेहद प्रभावित थे और वीरगति को प्राप्त होने से पहले तक वह नानी को लगातार चिट्ठियां लिख कर कारगिल की गतिविधियों के बारे में बताया करते थे। कारगिल युद्ध के दौरान बर्फ की चादर से ढकी कारगिल की चोटियों पर वह हथियार खत्म होने के बावजूद भी आगे बढ़ते रहे। उन्होंने अंतिम सांस तक दुश्मनों मुकाबला किया। कारगिल युद्ध जीतने के बाद भारतीय सेना ने कारगिल के तुरतुक सेक्टर का नाम हनीफुद्दीन सब सेक्टर रखा है। 
 

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कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया
शहीद कैप्टन हनीफुद्दीन की स्मृति में पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज- 1 में सड़क और स्कूल का नाम उनके नाम पर रखा गया है। भाई नफीस ने बताया कि उन्होंने कैप्टन हनीफुद्दीन के नाम पर साल 2000 में कुल्लू में भी गरीब बच्चों के लिए एक विद्यालय खोला है। 

 
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अमर शहीद स्मारक - फोटो : अमर उजाला
60 दिन तक चला था युद्ध..कारगिल विजय दिवस यानी 26 जुलाई भारत के लिए गौरव का दिन है। कारगिल युद्ध मई 1999 से जुलाई 1999 तक लगभग 60 दिनों तक चला था। 26 जुलाई को भारत की जीत के साथ इसका अंत हुआ था। इसका कोड नाम ऑपरेशन विजय रखा गया था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना के 527 जांबाज जवान शहीद हुए थे और 1467 घायल हुए थे।
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