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पंजाब में एक तीर से दो हमले कर रही 'आप', ये है उसका अंदाज

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पठानकोट में आतंकी हमले का शिकार शहीदों से आज मिलने पहुंचे केजरीवाल 14 जनवरी से पंजाब चुनाव की तैयारी का बिगुल फूंकेंगे। हालांकि इससे पहले ही आप का चुनावी मिशन सोशल मीडिया पर (#ChaloMuktsar) वायरल हो रहा है जिसमें केजरीवाल का पंजाबी भाषा की ओर झुकाव और आप नेता कुमार विश्वास का ट्वीट चर्चा में है। (सभी फोटो : सोशल मीडिया)
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पंजाब में एक तीर से दो हमले कर रही 'आप', ये है उसका अंदाज

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दिल्ली चुनाव के उलट आम आदमी पार्टी पंजाब विधान सभा का चुनाव मुख्यमंत्री के चेहरे के बिना लड़ेगी। हालांकि चुनावी चेहरा अरविंद केजरीवाल ही होंगे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुक्तसर रैली को सफल बनाने के लिए आम आदमी पार्टी ने पंजाब में ’पंजाब केजरीवाल दे नाल’ कैंपेन शुरू किया है।
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सोशल मीडिया पर पार्टी के कार्यकर्ता सक्रियता से अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, दिल्ली की तर्ज पर पार्टी ने एक डिजीटल कैंपने का खाका भी तैयार किया है। इसके लिए पार्टी पंजाबी भाषा का प्रयोग बोलचाल और लेखन में कर रही है। इस बीच आप ने मदद का ऐलान करते हुए पठानकोट में शहीद हुए दो जवानों फतेह सिंह और कुलवंत सिंह के परिवार को दो-दो लाख रूपए की मदद का ऐलान किया है। पार्टी उस टैक्सी ड्राइवर एकागर सिंह के परिवार को भी दो लाख रुपए देगी, जिसे पठानकोट हमले के आतंकवादियों ने मार डाला था।

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दूसरी तरफ पंजाब प्रभारी संजय सिंह और सह-प्रभारी दुर्गेश पाठक ने पिछले कई दिनों से पंजाब में डेरा डाल रखा है। पार्टी अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस को पंजाब में अपनी ताकत का अहसास कराने की कोशिश में हैं।
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दिल्ली सरकार के कामों के साथ पंजाब में बढ़ती नशाखोरी के मुद्दे पर पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी। इसकी शुरुआत 14 जनवरी की मुक्तसर रैली से होगी।
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पंजाब चुनाव के लिए पार्टी बेहद संजीदगी से कदम आगे बढ़ा रही है। रणनीतिकारों ने इस पर काफी मंथन किया कि पंजाब में मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जाए या नहीं।
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कुछ लोगों का मानना था कि दिल्ली चुनाव की तर्ज पर नाम आगे करना बेहतर रहेगा। वहीं, कई लोगों की राय थी कि बगैर किसी का नाम आगे बढ़ाए चुनावी मैदान में उतरा जाए।

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फिलहाल फैसला किया गया है कि बगैर मुख्यमंत्री उम्मीदवार के ही चुनावी दंगल में जाना ठीक रहेगा। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले उम्मीदवार के चाल-चलन का सटीक आकलन नहीं किया जा सकता है।
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इसके लिए दिल्ली सरकार से हटाये गए दो मंत्रियों की नजीर भी दी जा रही है। ऐसे में अगर आखिरी वक्त में विपक्षी मुख्यमंत्री उम्मीदवार के खिलाफ कोई बड़ा आरोप लगते हैं तो सारी चुनावी रणनीति ढह जाएगी।
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