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मिसाल : घरों और ढाबों में झाड़ू पोछा कर लगाया मेडलों का अंबार

Wed, 13 Jan 2016 12:43 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
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मन में चाह हो तो राह भी खुद ही मिल जाती है। उत्तराखंड के एथलीट दीपक सिंह के माता-पिता उन्हें पढ़ा-लिखा कर एक अफसर बनाना चाहते थे, लेकिन खेलकूद में रुचि उन्हें दिल्ली की ओर खींच लाई।

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यहां से उन्होंने एक बड़ा एथलीट बनने के लिए उड़ान भरी। दौड़ में वह अब तक 700 से अधिक पदक जीत चुके हैं। वह दिल्ली स्टेट प्रतियोगिता में पिछले चार साल से लगातार स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाए हुए हैं।
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दीपक मंगलवार को फरीदाबाद में आयोजित रन फॉर स्ट्रैंथ में हिस्सा लेने के लिए आए थे, जिसमें उन्होंनें 1500 धावकों को पीछे छोड़ते सबसे तेज धावक का खिताब एक बार फिर अपने नाम किया। यह दौड़ पांच किलोमीटर की थी। जिसे दीपक ने महज 14:52 मिनट में पूरा कर लिया।

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उत्तराखंड स्थित रानीखेत के रहने वाले 19 वर्षीय दीपक ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि स्कूल स्तर पर भी उन्होंने 100 व 200 मीटर दौड़ में कई पदकों पर कब्जा जमाया। सन् 2000 में आठवीं कक्षा में कंपार्टमेंट आने के बाद पढ़ाई व घर छोड़कर दिल्ली आ गए।
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पेट भरने और अपने हौसलों को उड़ान देने के लिए उन्होंने विभिन्न होटल, ढाबों और घरों में झाडू-पोछा, बर्तन साफ करने का काम किया लेकिन दौड़ने का अभ्यास नहीं छोड़ा।

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दीपक ने बताया कि 2001 में एक होटल में नेवी के अफसर डॉ. अमित खाना खाने पहुंचे थे, जहां टेबल साफ करने के बाद वह होटल के पीछे अभ्यास करते हुए अमित ने देख लिया और साथ ले गए।
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