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विश्व पर्यटन दिवस: सैलानियों की नजरों से दूर हैं उत्तराखंड के ये खूबसूरत और अनजाने स्थल, तस्वीरें देख आना चाहेंगे यहां...

Mon, 27 Sep 2021 01:46 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

तीर्थाटन के साथ ही अब सरकार का साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर है। साहसिक पर्यटन को रोजगार से जोड़कर नए स्थलों को विकसित करने पर काम किया जा रहा है।
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उत्तराखंड के पर्यटन स्थल - फोटो : अमर उजाला
विश्व प्रसिद्ध चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री से उत्तराखंड की देश दुनिया में पहचान है। लेकिन यहां कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। इन पर्यटन स्थलों की खूबसूरती देखते ही बनती है। वहीं, तीर्थाटन के साथ ही अब सरकार का साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर है। साहसिक पर्यटन को रोजगार से जोड़कर नए स्थलों को विकसित करने पर काम किया जा रहा है। वहीं, कोरोना महामारी से पर्यटन उद्योग को हुए नुकसान के लिए शीतकालीन पर्यटन बढ़ावा देने की सरकार की योजना है।

वहीं, प्रदेश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटक सुविधाओं के विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने की चुनौती है। प्रदेश में कई ऐसे गुमनाम पर्यटक स्थल जो सुविधाओं के अभाव में देश दुनिया से आने वाले पर्यटकों की पहुंच से दूर हैं। उत्तराखंड में पर्यटन को नई पहचान देने के लिए सरकार ने 13 जिलों में थीम आधारित 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने की योजना शुरू की है।

इस योजना पर अब तक 11 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है। जबकि लगभग 20 करोड़ के पर्यटन विकास के प्रस्ताव प्रक्रिया में है। योजना का मकसद प्रत्येक जिले में थीम आधारित पर्यटन विकास को बढ़ावा देकर पर्यटकों को उत्तराखंड के प्रति आकर्षित करना है। तो चलिए तस्वीरों में आपको दिखाते हैं प्रदेश के कुछ ऐसे पर्यटन स्थल जिनकी खूबसूरती आपको भी यहां आने पर मजबूर कर देगी।  
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फ्लोटिंग हट्स - फोटो : अमर उजाला
टिहरी झील की फ्लोटिंग हट्स आकर्षण का केंद्र
घनसाली से लेकर चिन्यालीसौड़ तक 42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी झील पर्यटकों के लिए आकर्षण केंद्र बन गई है। साहसिक खेलों के शौकीन पर्यटक झील में दिन में बोटिंग का लुत्फ उठा रहे हैं और रात फ्लोटिंग हट्स में गुजारते हैं। पर्यटकों के लिए पानी पर बनाई गई हट में पहाड़ों के बीच रात गुजराना अनोखा अनुभव है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत झील किनारे कोटी कॉलोनी में पर्यटन सुविधाओं का विकास कर बोट्स का संचालन किया जा रहा है।  झील में गोरण के पास 11 करोड़ की लागत से 20 फ्लोटिंग हट्स भी बनाए गए हैं। हट्स पूरी तरह इको फ्रेंडली और आरामदायक हैं। हट्स में गर्मी और सर्दी का अहसास बिल्कुल नहीं होता है। हट्स में ठहरने वाले पर्यटकों को उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ देशी-विदेशी व्यंजन भी परोसे जाते हैं। कोटी कॉलोनी में आठ लॉग हट्स और थ्री स्टार टिहरी लेक रिजॉर्ट भी बनाया गया है। पर्यटकों के लिए झील में करीब 10 तरह की 100 बोटों का संचालन किया जा रहा है। 
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गरतांग गली - फोटो : अमर उजाला
59 साल बाद खुली गरतांग गली, बनी पर्यटकों की पंसद
भारत-चीन सीमा के निकट नेलांग घाटी में 59 साल बाद पर्यटकों के लिए गरतांग गली एक सैलानियों के लिए नया डेस्टिनेशन बनकर उभरी है। समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर खड़ी चट्टान को काटकर तैयार रास्ते का 64 लाख रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया गया है। भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक संबंधों की गवाह गरतांग गली करीब 150 साल पुरानी है। इसके बारे में कहा जाता है कि 150 मीटर लंबे इस पैदल ट्रेक का निर्माण पेशावर के पठानों ने किया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका निर्माण जादूंग गांव के सेठ धनीराम ने कामगारों की मदद से कराया था। इस रास्ते के जरिये भारत और तिब्बत के व्यापारी सुमला, मंडी से होते हुए उत्तरकाशी पहुंचकर नमक, मसाले, पशमीना ऊन और गुड़ का व्यापार किया करते थे। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद इनर लाइन क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर इसे बंद कर दिया गया था। यह जर्जर हो गई थी। वर्ष 2015 में गृह मंत्रालय ने नेलांग व जादूंग को पर्यटकों के लिए खोलने का निर्णय लिया। बाद में गरतांग गली का जीर्णोद्धार कर इसी साल 18 अगस्त को इसे पर्यटकों के लिए खोला गया।

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रुद्रप्रयाग का नागताल - फोटो : अमर उजाला
पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है नागताल 
केदारघाटी में फाटा से तीन किमी ऊपर घने जंगल के बीच स्थित नागताल जिले में पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। पर्यटन विभाग द्वारा इस रमणीक स्थल के प्रचार-प्रसार के लिए योजना बनाई गई है। साथ ही फाटा-जामू-नागताल ट्रेकिंग रूट को भी विकसित किया जा रहा है। इसी ट्रेकिंग रूट पर महर्षि जमदग्नि का प्राचीन आश्रम व नानतोली देवी का मंदिर भी है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। यहां से हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के साक्षात दर्शन होते हैं।नागताल तक पहुंचाने के लिए पर्यटकों को रुद्रप्रयग-गौरीकुंड राजमार्ग से फाटा पहुंचना होगा। यहां से लगभग तीन किमी पैदल दूरी पर वर्षभर साफ जल से भरा नागताल है। साथ ही चारों तरफ देवदार व अन्य प्रजाति के पेड़ों का सघन वन है।
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देहरादून में आनंदवन - फोटो : अमर उजाला
देहरादून का आनंदवन पर्यटकों को खींच रह अपनी ओर
देहरादून के झाझरा में विकसित आनंदवन सैलानियों की नई सैरगाह के रूप में तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां पर ध्यान केंद्र, कृत्रिम बुग्याल (हरियाले घास के मैदान ), जड़ी बूटियों वाली नक्षत्र वाटिका, ट्री हट, बंबू हट, उत्तराखंड में मिलने वाले जीवजंतु जैसे हाथी, तेंदुआ, बाघ की प्रतिकृतियां सबको लुभाती हैं। उत्तराखंड की परंपरा को देखते हुए हट के नाम केदार कुटीर और बद्री कुटीर रखे गए हैं। इसके अलावा यहां साहसिक पर्यटन की भी सामग्री मौजूद है। इसमें बर्मा ब्रिज, कमांडो नेट और जिप लाइन जैसी चीजें युवाओं को खास तौर पर अपनी ओर खींच रही हैं। बच्चों को लुभाने के लिए यहां बटर फ्लाई गार्डन और बर्डिंग पैराडाइज बनाया गया है। आनंदवन सोमवार को बंद रहता है। सुबह  10 बजे से पांच बजे तक खुला रहता है। यह देहरादून रेलवे स्टेशन से लगभग 13  और आईएसबीटी से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां ऑटो, सिटी बस और टैक्सी के जरिए आराम से पहुंचा जा सकता है।   
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हरिद्वार में जंगल सफारी - फोटो : अमर उजाला
अंधेर में सालभर करिए जंगल सफारी
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की ओर से प्रकृति प्रेमियों के लिए जंगल सफारी के लिए नया ट्रैक तैयार किया गया है। अंधेर बीट में बनाए गए इस ट्रैक का नाम भी अंधेर दिया गया है। इस ट्रैक के तैयार होने से अब पर्यटकों को जंगली जानवरों और प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने के लिए राजाजी के अन्य गेटों के खुलने का इंतजार नहीं करना होगा। ट्रैक पर साल में कभी भी आकर जंगल सफारी की जा सकेगी। यह ट्रैक हरिद्वार नगर से करीब दस किलोमीटर दूर चीला रेंज के मुख्यालय के पास है। यहां जाने के लिए हरिद्वार में उतरकर चंडीघाट पर पहुंचना होगा। इसके बाद निजी वाहन या फिर टैक्सी करके अंधेर गेट तक पहुंचा जा सकता है। दूसरी तरफ 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टीनेशन के तहत जनपद में विश्वभर के 52 शक्तिपीठ बनाए जाने हैं।
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उत्तराखंड की रूपकुंड झील
रोंगटे खड़े कर देता है रूपकुंड के नरकंकालों का रहस्य 
चारों ओर से बर्फीली चोटियों के बीच स्थित रहस्यमय रूपकुंड झील इस बार पर्यटकों की पहली पसंद बनी है। हैरान कर देने वाले नरकंकालों और अस्थियों की वजह से रूपकुंड रोमांच के शौकीनों की खास पसंद है। इस सीजन में अभी तक 300 से अधिक पर्यटक झील का दीदार कर चुके हैं। पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण के कारण पर्यटन स्थल सूने पड़े थे। इस वर्ष मई माह से पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही शुरू हुई, जिसके बाद रूपकुंड ट्रेक पर सबसे अधिक पर्यटकों की आवाजाही बनी रही।

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चेनाप घाटी - फोटो : अमर उजाला
पर्यटकों की नजरों से दूर है खूबसूरत चेनाप घाटी
फूलों और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर चेनाप घाटी (दूसरी फूलों की घाटी) आज भी पर्यटकों की नजरों से दूर है। जोशीमठ में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस घाटी में बरसात के सीजन में 300 प्रजाति के दुर्लभ फूल खिलते हैं। यहां कई तरह के वन्य जीव भी पाए जाते हैं। यहां ब्रह्म कमल, फेनकमल, एनीमोन, मार्श, गेंदा, प्रिभुला, स्नेक लिली, कोबरा लिली, पोटेंटीला, जेनेरियम, ब्लू पॉपी, तारक लिलियम, हिमालयी नीला, पोस्त बछनाग आदि के फूल खिलते हैं। फूलों की घाटी की तरह यह घाटी भी 15 दिन में रंग बदलती है। घाटी में जाने के जोशीमठ से दो रास्ते हैं। एक रास्ता घिवाणी और दूसरा मेलारी टॉप से होकर जाता है। 

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रुद्रेश्वर गुफा - फोटो : अमर उजाला
चंपावत जिले में पर्यटन को पहचान देगी रुद्रेश्वर गुफा
पाटी ब्लॉक के वारसी गांव की पाताल रुद्रेश्वर गुफा चंपावत जिले को नई पहचान देगी। 1993 में खोजी गई इस गुफा के भीतर शिवलिंग है। अब 40 मीटर और 18 मीटर चौड़ी इस गुफा को पर्यटन विभाग विस्तार देने की कार्ययोजना बना रहा है। वारसी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता परमानंद जोशी ने बताया कि वर्ष 1993 में बकरी चराने जंगल में गए एक बच्चे ने रुद्रेश्वर की इस गुफा को देखा, तो भीतर शिवलिंग नजर आया। अब पर्यटन विभाग इस गुफा को विकसित करने की पहल कर रहा है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि इस गुफा को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन सर्किट में शामिल किया है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गुफा का निरीक्षण कर चुकी है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि पर्यटकों की मदद के लिए चंपावत जिले में पहली पर्यटन पुलिस चौकी श्यामलाताल में खोलने की तैयारी है।

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किलबरी का जलाशय - फोटो : अमर उजाला
किलबरी में बना जलाशय खींच रहा लोगों का ध्यान
हाल ही में नैनीताल और इसके आसपास कई नए पर्यटक स्थल विकसित हुए हैं जहां अभी कम संख्या में सैलानी ही पहुंच रहे हैं। नैनीताल से लगभग 15 किलोमीटर दूर किलबरी में घने जंगलों के बीच वन विभाग की ओर से साल भर पहले बनाया गया जलाशय सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है। यह जलाशय वन विभाग ने जंगली जानवरों को पानी उपलब्ध कराने के लिए बनाया है। अब यह सैलानियों के भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। वन विभाग यहां ट्रैकिंग रूट भी तैयार कर रहा है। नैनीताल-भवाली रोड के किनारे भूमियाधार में भीमताल ब्लाक की ओर से बनाया गया सेल्फी प्वाइंट सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां से ज्योलीकोट समेत तराई भाबर का विहंगम नजारा देखा जा सकता है। नैनीताल-हल्द्वानी रोड में चील चक्कर बैंड से सनसैट का विहंगम नजारा दिखाई देता है। यहां से विंटर लाइन को भी देखने के लिए अब बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचने लगे हैं। 

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दारमा घाटी में है खूबसूरत झील - फोटो : अमर उजाला
दारमा घाटी के राजे ज्यू पीक में है खूबसूरत झील
पिथौरागढ़ जिले में कई छुपे स्थल अब धीरे-धीरे लोगों की नजरों में आ रहे हैं। इन्हीं में धारचूला में दारमा के हिमालयी क्षेत्र में एक खूबसूरत तालाब मिला है। लगभग एक किलोमीटर लंबे इस तालाब को झील भी कहा जा सकता है। इस झील को वर्ष 2020 में क्लाइंबिंग बियोंड द समीट्स (सीबीटीएस) टीम ने सेला पास में सफल आरोहण के दौरान ढूंढा था। यह झील चीन सीमा के निकट दारमा में स्थित नामा वैली क्षेत्र में राजे ज्यू पीक की तलहटी पर है। इस झील का फिलहाल कोई नाम नहीं है। पर्वतारोही योगेश गर्ब्याल के अनुसार इस स्थल पर लोग स्वर्ग की कल्पना कर सकते हैं। समुद्र तल से लगभग 5100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस झील तक पहुंचना अभी आसान नहीं है। उनके अनुसार जो पुराना रास्ता था वह अब चलने लायक नहीं है। केवल ट्रैकर ही यहां तक जा सकते हैं।  यदि सरकार इस स्थल तक उचित रूट तैयार करे तो यह पर्यटकों की पहली पसंद बन सकता है। 

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ऊधमसिंह नगर में बोटिंग - फोटो : अमर उजाला
ऊधमसिंह नगर : वाटर एडवेंचर का लुत्फ लेना है तो आइए गूलरभोज
कुमाऊं में आपको वाटर एडवेंचर राइड (जल क्रीड़ा) का लुत्फ लेना है तो ऊधमसिंह नगर के गूलरभोज जलाशय आइए। यहां मोटर बोट, कयाक, पलटून, डोनट बोट आदि साहसिक  गतिविधियां मौजूद हैं। गूलरभोज बौर जलाशय में जिला प्रशासन ने वर्ष 2020 में साहसिक जल क्रीड़ा की शुरुआत की थी। साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से बौर जलाशय में राष्ट्रीय क्याकिंग कैनोइंग प्रतियोगिता का आयोजन भी हुआ है। दिनेशपुर से बौर जलाशय 25 किलोमीटर दूर है, जबकि गदरपुर से 14 किलोमीटर की दूरी तय करके बाइक या कार से यहां पहुंचा जा सकता है। नैनीताल जाने वाले पर्यटक रामनगर से सीधे काशीपुर रोड होते हुए भी बौर जलाशय पहुंच सकते हैं। जिला पर्यटन अधिकारी पीके गौतम ने बताया कि पर्यटकों के लिए वहां पार्किंग की भी सुविधा है।
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देहरादून शहर का सुंदर दृश्य - फोटो : अमर उजाला
बिष्ट गांव से चंद्रोटी तक टौंस बनेगी नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन
प्राकृतिक वादियों के बीच बिष्ट गांव से चंद्रोटी तक टौंस नदी का पांच किलोमीटर तट अब दून में पर्यटकों के लिए नया डेस्टिनेशन होगा। पर्यटन विभाग नदी तट के इस हिस्से को विकसित करने की योजना बना रहा है। नदी तट पर वॉकिंग पाथ, पार्किंग, फूड क्योस्क, छोटे-छोटे तालाब आदि बनाए जाएंगे। शिवालिक की पहाड़ियों के बीच बसा देहरादून अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए विश्व में प्रसिद्धि है। सहस्रधारा, गुच्चूपानी, मालदेवता, लच्छीवाला, झड़ी पानी सहित यहां कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिनका लुत्फ उठाने प्रत्येक वर्ष हजारों पर्यटक आते हैं। यह अलग बात है कि 20 सालों में इन पर्यटन स्थलों को प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग ठीक से विकसित नहीं कर पाया है। आज भी पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को मूलभूत सुविधाओं, पार्किंग, बैठने, पेयजल, सड़क, शौचालय आदि की समस्या से जूझना पड़ता है। इन पर्यटन स्थलों के अलावा भी दून में कई स्थान रोमांच और आकर्षण से भरपूर है, अगर इन्हें विकसित किया जाए तो यह आने वाले दिनों में पर्यटकों को स्वत: ही अपने और आकर्षित करेंगे। इसी प्रयास के तहत पर्यटन विभाग ने अब बिष्ट गांव से चंद्रोटी तक टौंस नदी के लगभग पांच किलोमीटर हिस्से को नए पर्यटन वाटर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का खाका तैयार किया है। पर्यटन विभाग के मुताबिक नदी के दोनों तरफ सिंचाई विभाग और राजस्व की काफी भूमि है। नदी तट को विकसित करने के लिए गांवों के लोगों से भी बातचीत हो गई है। उन्हें समिति बनाकर सहस्रधारा की तरह इसका संचालन करने को कहा गया है। फिलहाल 15 लाख का बजट इसके लिए रखा गया है।
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