16 साल पहले परिजनों से बिछुड़ी उज्जैन निवासी लीला बाई की दास्तां किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। लीला बाई को मृत समझकर बेटियों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया था।
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नारी निकेतन देहरादून
- फोटो : AmarUjala
जैसे ही बेटियों को मां के जिंदा होने की सूचना मिली तो दौड़कर नारी निकेतन पहुंच गईं। इतने लंबे समय बाद मां से मिलीं तो खुशी के आंसुओं और भावनाओं का सैलाब एक साथ उमड़ पड़ा।
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- फोटो : अमर उजाला
मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण करीब 16 साल पहले उज्जैन निवासी लीला बाई घर से निकल गई थीं। तब से घर वाले उनकी तलाश कर रहे थे। बेटियों को मां तो नहीं मिली, लेकिन कुछ साल बाद पिता का साया भी उठ गया। इससे बेटियां पूरी तरह से टूट गईं।
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bapu lal, lila bai
- फोटो : file photo
उन्होंने पिता के साथ ही मां के अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी कर दी। मां लीला बाई और पिता बापू लाल के नाम के आगे स्वर्गीय लिखकर घर की दीवार पर दोनों की फोटो टांग दी। अब अचानक 16 साल बाद बेटियों को मां के दून के नारी निकेतन में होने की खबर मिली।
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मदर्स डे
- फोटो : ANI
छोटी बेटी बीना जब घर से मां को लेने के लिए निकली तो बड़ी बहन ने उससे कहा कि मां के सिर पर एक चोट का निशान है, पहले वह देख लेना। बहनों को यकीन नहीं था कि वाकई में मां मिल जाएगी। बीना ने यहां आकर मां को पहचान लिया और उसे चोट का निशान भी मिल गया। उसने फोन पर बहन को खुशखबरी सुनाई तो दोनों बहनें रो पड़ीं। बीना ने बताया कि हमने हर उम्मीद छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि मां जैसा कोई नहीं, हमें मां मिल गई तो दुनियां की सारी खुशियां मिल गई।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने बताया कि अब मानसिक रूप से कमजोर संवासिनियों की काउंसलिंग की जा रही है। उनसे अधिक से अधिक बात की जा रही है। वह जो भी बताती हैं उसे बराबर नोट किया जा रहा है। यही वजह है कि अब उनके घरों का पता लग पा रहा है।