उत्तरकाशी टनल में फंसे मजदूर
- फोटो : amar ujala
इस तरह के हादसों के कारण मानसिक आघात के साथ शारीरिक दिक्कतें भी होती हैं जिसमें नींद न आना, सिरदर्द और फोबिया की समस्या हो सकती है। इसके उपचार के लिए काउंसलिंग जरूरी है। यदि काउंसलिंग से भी व्यक्ति ठीक न हो तो उसे मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
-प्रो.मंजू खंडूड़ी पांडेय, एचओडी मनोविज्ञान विभाग, गढ़वाल केंद्रीय विवि।