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Uttarkashi Tunnel Collapse: फूटा मजदूरों का गुस्सा, कंपनी की बड़ी लापरवाही आई सामने, इस वजह से हुआ भूस्खलन

Wed, 15 Nov 2023 01:37 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
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उत्तरकाशी में टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी। - फोटो : amar ujala

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग के निर्माण में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। सुरंग के जिस संवेदनशील हिस्से में भूस्खलन हुआ वहां उपचार के लिए गार्टर रिब की जगह सरियों का रिब बनाकर लगाया गया है।

सुरंग निर्माण से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां गार्टर रिब लगाया गया होता तो भूस्खलन नहीं होता। बीते रविवार को निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन की घटना घटी जिसके चलते 40 मजदूर सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं।

निर्माण में लगी कंपनी की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। सुरंग के एक मशीन ऑपरेटर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी से जुड़े लोगों की लापरवाही से आज 40 लोगों का जीवन संकट में है।

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उत्तरकाशी टनल हादसा - फोटो : amar ujala

शायद नहीं होता हादसा...
बताया कि सिलक्यारा सुरंग के मुहाने से 200 मीटर अंदर जहां भूस्खलन हुआ है वह हिस्सा संवेदनशील है जिसमें गार्टर रिब की जगह 32 एमएम की सरियों से बना रिब लगाया गया। जो कि मलबे का दबाव नहीं झेल पाया। बताया कि यहां गार्टर रिब लगाया गया होता तो शायद यह हादसा नहीं होता।

 

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उत्तरकाशी टनल हादसा - फोटो : amar ujala

सुरंग के अंदर हैं दो संवेदनशील प्वाइंट

निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में दो प्वाइंट भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। पहला प्वाइंट सिलक्यारा मुहाने से 200 मीटर की दूरी पर है, जिसमें वर्तमान में भूस्खलन हुआ है। एक अन्य सिलक्यारा वाले मुहाने से ही 2000 से 2100 मीटर के मध्य है। टनल के एक मशीन ऑपरेटर ने बताया कि 2000 से 2100 के बीच वाले संवेदनशील पार्ट का स्थाई उपचार हुआ है लेकिन 200 मीटर के निकट वाले का नहीं।
 

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उत्तरकाशी टनल हादसा - फोटो : amar ujala

भूस्खलन से दबी हैं दो मशीन

रविवार को सुरंग में हुए भूस्खलन के मलबे में एक शॉटक्रिट मशीन व एक बूमर मशीन दबने की सूचना मिली है। एक मशीन ऑपरेटर ने बताया कि यहां उस दौरान ट्रीटमेंट का काम चल रहा था। जब हल्का मलबा गिरा तो इन मशीनों में कार्यरत कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई।

 

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उत्तरकाशी टनल हादसा - फोटो : amar ujala
टनल के संवेदनशील हिस्से को छोड़कर आगे काम करना खतरनाक होता है। संवेदनशील हिस्से का स्थिरीकरण करना जरूरी होता है। जब स्थिरीकरण करते हुए आगे बढ़ते हैं तो जैसा भूस्खलन टनल में हुआ है, इसका खतरा नहीं होता है। -प्रो.कमल जैन, आईआईटी रुड़की वैज्ञानिक
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