600 मेगावाट की थी परियोजना
600 मेगावाट की लोहारीनाग पाला परियोजना का निर्माण एनटीपीसी ने वर्ष 2005 में शुरु हुआ था। लेकिन इसका निर्माण शुरु होने के साथ ही विवादों में आ गई थी। पर्यावरणविद् प्रो.जीडी अग्रवाल ने परियोजना निर्माण से पर्यावरण को खतरा बताते हुए इसका विरोध किया। जिसके चलते इसे वर्ष 2010 में बंद कर दिया गया। परियोजना के लिए आधी-अधूरी बनी सुरंगों को ऐसे ही छोड़ दिया गया।
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आधा-अधूरी बनीं सुरंगे बड़ा खतरा हो सकती हैं। भूकंप के दौरान ऐसी सुरंगें धंसने से जान-माल का नुकसान हो सकता है। इस तरह की सुरंगों का ट्रीटमेंट काया जाना चाहिए।
-डॉ.सुशील कुमार, भूगर्भ वैज्ञानिक
हादसे के बाद बॉबी और संतोष ने हारी हिम्मत बोले-अब नहीं लौटेंगे
निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में काम करने वाले संतोष व बॉबी सिलक्यारा सुरंग हादसे के बाद हिम्मत हार चुके हैं। इस हादसे के बाद सुरंग में फंसे संतोष ने जहां 17 दिन तक जिंदगी के लिए जद्दोजेहद की। वहीं बाॅबी ने सुरंग में फंसे अपने छोटे भाई संतोष को बचाने के लिए सुरंग के बाहर संघर्ष किया। अब दोनों भाइयों ने दोबारा सिलक्यारा वापस नहीं आने का फैसला किया है। उत्तरप्रदेश के मोतीपुर श्रावस्ती निवासी संतोष कुमार भी सुरंग के अंदर फंस गए थे। संतोष के बड़ा भाई बॉबी दिन की शिफ्ट में होने के चलते सुरंग से बाहर ही थे। संतोष का कहना है कि शुरुआत में उन्हें लगा कि वह यहां से कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे। लेकिन जब उन्हें पाइपलाइन से खाना मिला तो उम्मीद बंधी कि उन्हें बचाने के प्रयास हो रहे हैं। दोनों ही भाई अब गांव लौट चुके हैं। बॉबी का कहना है कि वह दोनों अब कभी सिलक्यारा नहीं लौटेंगे। वह दोबारा उस सुरंग में नहीं जाएंगे। वह ऐसा काम चुनेंगे जहां जान का जोखिम नहीं होगा।