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PM मोदी ने माना उत्तराखंड के इन जांबाजों की काबिलियत का लोहा

Sun, 18 Dec 2016 05:20 PM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
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जीएसटी, ब्लैक मनी, नरेंद्र मोदी - फोटो : self
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में उत्तराखंड की मेधा अपनी चमक बिखेर रही है। प्रदेश की तमाम विभूतियों ने अपनी प्रतिभा के दम पर दुनियाभर में नाम कमाया है। लेकिन पिछले कुछ समय से पूरा देश उत्तराखंड के जांबाजों की काबिलियत का लोहा मान रहा है। तमाम महत्वपूर्ण पदों पर प्रदेश के लोगों की ताजपोशी हो रही है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी के विश्वस्तों में भी इनका स्‍थान है।
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bhaskar khulbe, ajit dobhal
मजबूत इरादे, नेतृत्व क्षमता, कर्मठ और ईमानदार छवि के चलते उत्तराखंडियों ने हमेशा अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी कड़ी में नया नाम जुड़ा है रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के नए चीफ अनिल धस्माना और नए सेना प्रमुख बिपिन रावत का। ये दोनों मूलत: पौड़ी जिले के निवासी है। धस्माना और रावत से पहले एनएसए अजीत डोभाल, पीएमओ सचिव भाष्कर खुल्बे, डीजीएमओ ले.ज. एके भट्ट और कोस्ट गार्ड प्रमुख राजेंद्र सिंह राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पद संभाल रहे हैं।
 
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Bipin Rawat to be the New chief of Army Staff and B. S. Dhanoa to be the New chief of Air Staff - फोटो : ANI
बिपिन रावत, सेना प्रमुख
उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के मूल निवासी ले. जनरल बिपिन रावत को देश का नया सेना प्रमुख बनाया गया है। इनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत भी ले. जनरल रहे हैं। बिपिन रावत को अधिक ऊंचाई वाले स्थान पर युद्ध और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों का अनुभव प्राप्त है। वे पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर इंफेंट्री बटालियन की कमान भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और एक इंफेंट्री डिवीजन की कमान भी संभाली है। बिपिन रावत को एक सितंबर 2016 को सेना का उप प्रमुख बनाया गया था। इससे पहले वे सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर थे। 
 

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anil dhasmana
अनिल धस्माना, रॉ चीफ
जयहरीखाल ब्लॉक के तोली गांव निवासी महेशानंद धस्माना के बेटे अनिल धस्माना को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का नया चीफ बनाया गया है। अनिल धस्माना की शिक्षा-दीक्षा मूल गांव तोली के बाद दिल्ली से हुई। 1981 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी धस्माना को इंदौर के ऑपरेशन बांबे बाजार के बाद एक दबंग अधिकारी के रूप में पहचान मिली। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बेहद करीबी और विश्वासपात्र माना जाता है। पिछले काफी समय उन्होंने रॉ के विशेष निदेशक पद पर सेवाएं दीं। उनके ससुराली देहरादून में सुभाष रोड और ओल्ड सर्वे रोड पर रहते हैं।
 
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ajit dobhal
अजीत डोभाल, एनएसए
20 जनवरी 1945 को घीड़ी बानेलस्यू, पौड़ी गढ़वाल में जन्मे अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राइट हैंड माना जाता है। अजमेर के मिलिट्री स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगरा विवि से अर्थशास्त्र में एमए किया। 1968 बैच के केरल कैडर र्के आईपीएस अधिकारी रहे डोभाल 2005 में आईबी चीफ पद से रिटायर हुए। मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। वह 30 मई 2014 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने। उनके नेतृत्व में ही म्यांमार के खिलाफ सीमा पार जाकर जवाबी हमला और पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की गई।
 
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भास्कर खुल्बे (बायें) - फोटो : AmarUjala
भाष्कर खुल्बे, पीएमओ सचिव
नैनीताल निवासी भाष्कर खुल्बे 1983 बैच के पश्चिम बंगाल बैच के आईएएस अधिकारी हैं। मूलत: तल्लीताल, नैनीताल निवासी भाष्कर खुल्बे की शिक्षा-दीक्षा नैनीताल से हुई। 1980 में उन्होंने कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर से बीएससी किया। वेस्ट बंगाल फिशरीज कॉरपोरेशन, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल (डीओपी) व पश्चिम बंगाल के रेजीडेंट कमिश्नर के रूप में उनके काम को खूब सराहा गया। लंबे समय तक अलग-अलग पदों पर रहने के बाद 2014 में उन्हें पीएमओ में नियुक्ति मिली। करीब दो वर्ष की सेवा के बाद कुछ माह पूर्व ही बेहद ईमानदार और मेहनती छवि के भाष्कर को पीएमओ सचिव के पद पर पदोन्नति मिली।
 
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एके भट्ट को मेजर जनरल रहते हुए अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
ले. ज. एके भट्ट, डीजीएमओ
मूलत: खतवाड़ गांव, कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल निवासी ले.ज. एके भट्ट को कुछ दिन पूर्व ही डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) बनाया गया है। उनके पिता सत्यप्रकाश भट्ट ने लंबे समय तक भारतीय सेना में सेवाएं दी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मसूरी के हेंपटनकोर्ट और कांवेंट स्कूल सेंट जॉर्ज कॉलेज से हुई। गोरखा राइफल्स में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्हें ले.ज. रणबीर सिंह के तबादले के बाद डीजीएमओ बनाया गया था। उनका परिवार पिछले करीब पांच दशक से मसूरी में ही निवास करता है। एके भट्ट मसूरी में क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।
 
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rajendra singh
राजेंद्र सिंह, कोस्ट गार्ड प्रमुख
भारतीय तटरक्षक (कोस्ट गार्ड) के डायरेक्टर जनरल (डीजी) राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के चकराता से हैं। उन्होंने 25 फरवरी 2016 को कार्यभार संभाला था। राजेंद्र सिंह कोस्ट गार्ड सेवाओं के पहले अधिकारी हैं जो इस रैंक तक पहुंचे हैं। उन्होंने भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल एचसीएस बिष्ट से कार्यभार लिया। तब एडमिरल बिष्ट की नौसेना पूर्वी कमान के कमांडर इन चीफ पर पदोन्नति हुई थी। देहरादून जिले के चकराता के रहने वाले राजेंद्र सिंह गढ़वाल यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं। उन्होंने वर्ष 1980 में भारतीय तटरक्षक सेवाओं को ज्वाइन किया था।
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