उत्तराखंड में भारी बारिश से रैणी गांव के पास जोशीमठ-मलारी हाईवे का करीब 40 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे सेना, आईटीबीपी की चीन सीमा और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) व नीती घाटी के ग्रामीणों की आवाजाही ठप हो गई है। वहीं रैणी गांव में भी भू-धंसाव शुरू हो गया है। ऋषि गंगा का जलस्तर बढ़ने से बीआरओ द्वारा बनाया गया वैली ब्रिज भी खतरे की जद में आ गया है।
रविवार रात को रैणी क्षेत्र में भारी बारिश हुई थी, जिससे ऋषि गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। रैणी गांव के निचले हिस्से में भू-धंसाव होने से जोशीमठ-मलारी हाईवे का करीब 40 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे चीन सीमा क्षेत्र का देश-दुनिया से संपर्क टूट गया। साथ ही रैणी गांव में वन विभाग का भवन, गौरा देवी के नाम से निर्मित गेस्ट हाउस और चार अन्य आवासीय मकान भी भू-धंसाव की चपेट में आ गए हैं।
फरवरी में आई आपदा के बाद बीआरओ ने रैणी गांव में मलारी हाईवे पर वैली ब्रिज बनाया था। रविवार रात को ऋषि गंगा का जलस्तर बढ़ने से ब्रिज के नीचे भी भू कटाव शुरू हो गया है, जिससे पुल पर वाहनों की आवाजाही खतरे से खाली नहीं है। बीआरओ ने यहां सुधारीकरण शुरू कर दिया है। वहीं हाईवे के क्षतिग्रस्त होने से सोमवार को सेना के जवानों के साथ ही स्थानीय लोगों को लंबी दूरी पैदल ही तय करनी पड़ रही है।