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पिथौरागढ़ आपदा: मंगलवार को भी मलबे से मिले चार शव, सात हुई मृतकों की संख्या, सात अब भी लापता

Tue, 21 Jul 2020 10:27 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से 93 किलोमीटर दूर बंगापानी तहसील के टांगा गांव में मंगलवार को मलबे से पिता-पुत्र और बहू समेत चार लोगों के शव निकाले गए, जबकि इस परिवार के दो बच्चों समेत तीन सदस्य लापता हैं। इस आपदा से गैला और टांगा दोनों गांवों में मरने वालों की संख्या अब सात हो गई है, जबकि टांगा मुनियाल गांव के दंपती समेत सात लोग लापता हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि टांगा मुनियाल और गैला गांव में रविवार देर रात हुई अतिवृष्टि में गैला गांव में दंपती और बेटी की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हो गए। वहीं, टांगा मुनियाल गांव में 11 लोग लापता हो गए, जिनमें से दो लोगों के शव सोमवार शाम मलबे दिखे, लेकिन अंधेरा होने की वजह से इन्हें नहीं निकाला जा सका। मंगलवार को शवों को ढूंढने का काम शुरू हुआ तो उक्त दो शवों के अलावा दो और शव बरामद हुए। 
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- फोटो : अमर उजाला
रविवार रात भारी बारिश के दौरान भूस्खलन से मकानों के ध्वस्त होने से बंगापानी तहसील के टांगा गांव में माधो सिंह समेत 11 लोग मलबे में दब गए थे। वहीं, नंदन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सोमवार को माधो सिंह के मकान के मलबे में शवों को ढूंढने का प्रयास किया गया था। सोमवार देर शाम को दो शव मलबे में नजर आए थे। इसके बाद काम रोक दिया गया था। मंगलवार सुबह एसडीआरएफ की टीम ने फिर से मलबे को हटाने का काम शुरू किया। इस दौरान मलबे में पिता-पुत्र और बहू समेत चार लोगों के शव बरामद हुए। 

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इनके शव हुए बरामद
1. माधो सिंह पुत्र चंद्र सिंह
2. गणेश सिंह पुत्र माधो सिंह
3. हीरा देवी पत्नी गणेश सिंह
4. रोशन कुमार पुत्र जीत राम
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ये अब भी हैं लापता
1. जीत राम पुत्र हुड़किया राम
2. पार्वती देवी पत्नी जीत राम
3. तुलसी देवी पत्नी माधो सिंह
4. दिव्यांशु पुत्र गणेश सिंह
5. लक्की पुत्री गणेश सिंह
6. पुष्पा देवी पत्नी भीम सिंह
7. प्रतिमा देवी पत्नी खुशाल सिंह
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टांगा (पिथौरागढ़) डीएम डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, एसपी प्रीति प्रियदर्शनी भी पूरे दिन मौके पर मौजूद रहे। रेस्क्यू अभियान में एसडीआरएफ के जवानों को ग्रामीणों ने भी सहयोग दिया। बाद में शवों का पोस्टमार्टम किया गया। शवों को तलाशने के दौरान टांगा गांव में सैकड़ों लोगों की भीड़ मौजूद थी लेकिन मातमी सन्नाटा पसरा रहा। इस भयावह आपदा को देखकर ग्रामीण बुरी तरह से सहमे हुए हैं। 
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- फोटो : अमर उजाला
बंगापानी तहसील के टांगा गांव में आई आपदा ने बरम, ला झेकला और बस्तड़ी हादसों की याद दिला दी। इन हादसों में भी न केवल असमय लोगों की जिंदगियां खत्म हो गईं बल्कि गांव का नामोनिशान मिट गया था। खेती की जमीन रोखड़ में तब्दील हो गई थी। बरम में वर्ष 2007 में आई आपदा में सात लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2009 में मुनस्यारी के ला झेकला में 43 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2016 में कनालीछीना के बस्तड़ी गांव में 22 लोगों की मौत हो गई थी। 
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ला झेकला में भी सड़क के ऊपरी हिस्से में बादल फटने से निकले सैलाब ने पूरे गांव को लील लिया था जबकि गांव के खेत पूरी तरह से मलबे से पट गए थे। इसी तरह बस्तड़ी का गांव भी रोखड़ में तब्दील हो गया था। यही हालात इस साल टांगा गांव में हुए हैं। टांगा गांव में जहां पर मकान थे वहां अब मलबा पड़ा है। खेत भी बह चुके हैं। गांव में प्रवेश करते ही जहां तक नजर जा रही है केवल बर्बादी का ही मंजर नजर आ रहा है। 
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