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उत्तराखंड: गर्मी शुरू होते ही धधकने लगे जंगल, आग बुझाने में ग्रामीणों के हाथ झुलसे, तस्वीरें...

Tue, 02 Mar 2021 02:28 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़/ कर्णप्रयाग
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उत्तराखंड के जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड में गर्मी शुरू होते ही जंगल धधकने लगे हैं। सोमवार देर रात कीर्तिनगर-सिल्काखाल मोटर मार्ग पर भी जंगल में आग लग गई। वहीं, पिथौरागढ़ में चौली ग्राम पंचायत के जंगल  भी धधकते रहे।

चौली ग्राम पंचायत के जंगल में लगी आग से वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचा है। सूचना के बाद भी वन विभाग की टीम के न पहुंचने पर लोगों ने स्वयं आग बुझाई। इस दौरान कुछ ग्रामीणों के हाथ मामूली रूप से झुलस गए। लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया है।

लोगों ने  आग की सूचना वन विभाग को दी, लेकिन टीम के न पहुंचने के कारण लोगों ने सरपंच भुवन सिंह के नेतृत्व में आग बुझाना शुरू किया। करीब पांच से छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग बुझाने में कुछ लोगों के हाथ मामूली रूप से झुलस गए। पूर्व छात्रसंघ सचिव करन खाती ने बताया कि आग में वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। जंगल की तलहटी में कई पेयजल स्रोत हैं। वहीं, कीर्तिनगर-सिल्काखाल मोटर मार्ग पर चौरास पट्टी के नैग्याणा गांव के ऊपर जंगल में भी आग से वन संपदा को नुकसान हुआ। उप प्रभागीय  वनाधिकारी डीपी बलोनी ने बताया कि आग बुझाने के लिए कर्मचारी भेजे गए हैं।
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उत्तराखंड के जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
दूसरी ओर कर्णप्रयाग में नगरपालिका परिषद कार्यालय के पास चीड़ के जंगल में आग लग गई। जिससे सैकड़ों पेड़-पौधे जल गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर वन विभाग के कर्मचारियों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन रात तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका ओर तेज हवाएं चलने से जंगल की आग और  भड़कती गई।
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उत्तराखंड के जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय दिनेश, बीरेंद्र, बृजेश ने बताया कि शाम को आग लोक निर्माण विभाग के बारूद घर के पास तक पहुंच जाती, लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों ने आग को बारूद घर तक पहुंचने से पहले ही बुझा दिया।

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उत्तराखंड के जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों में चीड़ के पेड़ों की बढ़ती संख्या के कारण बांज, मोरू, खरसू, बुरांश, काफल, अगिंयार, फनियाट के पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। जानकारों का कहना है कि समय रहते चीड़ के विस्तार को नहीं रोका गया तो चौड़ी पत्ती वाले वनों की प्रजाति को काफी नुकसान हो सकता है। चीड़ के जंगलों में आग तेजी से फैलती है साथ ही यह पेड़ जमीन से पानी सोखते हैं जिस कारण जलस्रोत भी सूख जाते हैं।
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जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
इस बार पिंडर घाटी सहित कर्णप्रयाग क्षेत्र में चीड़ के जंगल गर्मी का सीजन शुरू होने से पहले ही जल चुके हैं। थराली ब्लॉक में दिसंबर व जनवरी माह में आग लगने से चीड़ के 90 प्रतिशत जंगल जल चुके हैं। पर्यावरणविद् महिपाल रावत ने कहा कि चीड़ के जंगलों से हर दो महीने में पीरूल की सफाई की जानी चाहिए, ताकि आग न भड़क सके।
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जंगल में आग - फोटो : अमर उजाला
भूगोलवेत्ता डॉ. देवीराम और डॉ. जेएस कंडारी का कहना है कि चीड़ का एक वयस्क पेड़ जमीन से प्रतिदिन 54 लीटर पानी खींचता है, जबकि उसकी वाष्पीकरण की मात्रा शून्य है। ऐसे में जलस्रोत सूखते हैं। जंगलों में घास की कमी हो रही है। इससे जंगलों में आग लगने का खतरा भी बना रहता है। 
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