अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला में शहीद हुए कुमाऊं रेजीमेंट के हवलदार मुकेश कुमार का पार्थिव शरीर बुधवार तड़के काशीपुर पहुंचा। चैती चौराहे पर शव आने की प्रतीक्षा में खड़े लोगों ने अश्रुपूरित नेत्रों से शहीद मुकेश को श्रृद्धांजलि दी। नंदरामपुर के श्मशानघाट में सैन्य सम्मान के साथ शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
शहीद का पार्थिव शरीर गांव नंदरामपुर पहुंचते ही कोहराम मच गया। शहीद की पत्नी नीलम और दोनों बेटे विशाल और ऋषभ शव से लिपटकर रो पड़े। शहीद की दोनों बहनें बबली और कविता पहले ही टांडा रामपुर और जसपुर से आ गईं थीं।
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भाई का शव देखकर उनका धैर्य भी जवाब दे गया। दोनों बहनें भी बिलख कर रो पड़ीं। छोटे भाई मुनेश ने बताया कि वह रानीखेत में फल विक्रेता है। उसे कैंसर हो गया था। 2016 में बड़े भाई मुकेश ने ही ऑपरेशन कराया था।
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माता-पिता की मौत के बाद बड़ा भाई ही उसका सहारा था। वह उसके इलाज और खर्च आदि का ख्याल रखता था। शहीद के पैतृक गांव गक्खरपुर से भी चाचा बब्बन, संतोष समेत पूरा परिवार मुकेश को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचा था।
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पार्थिव शरीर को सजी गाड़ी में रखकर पुष्पवर्षा की गई। सम्मान के साथ शहीद के गांव नंदरामपुर तक शव यात्रा निकाली गई। इस दौरान शहीद के सम्मान में नारेबाजी भी हुई। सुबह करीब 11 बजे श्मशानघाट पर सैन्य सलामी के बाद लोगों ने शहीद मुकेश को अंतिम विदाई दी।
शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्री और पूर्व सांसद भी पहुंचे थे। अंतिम संस्कार से पूर्व आरटीएस डिपो हेमपुर से रिसालदार ईश्वर सिंह के नेतृत्व में सैन्य कर्मियों ने शहीद मुकेश को सलामी दी।