बीते साल ऐतिहासिक झंडे जी का आरोहण कोरोना संकट के बीच हुआ था। संक्रमण के कारण मेला केवल दो दिन ही चला, लेकिन इस बाद दरबार साहिब और मेले में रौनक है। प्रेम, सद्भावना, भाईचारा, मानवता, श्रद्धा व आस्था का प्रतीक ऐतिहासिक श्री झंडा जी मेला इस साल भव्य स्वरूप में आयोजित हो रहा है। सुबह सात बजे पुराने श्री झंडे जी को उतारा गया। इसके बाद नए झंडे जी पर गिलाफ चढ़ाया जा रहा है।
इस दौरान भारी संख्या में संगतें मौजूद हैं। देहरादून में आयोजित होने वाला श्री झंडे जी मेले का अपना इतिहास है। इसके लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित देश के अलग-अलग जगहों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु श्री दरबार साहिब पहुंचते हैं। श्री झंडे जी मेले के लिए श्री दरबार साहिब को विशेष रूप से सजाया गया है। रात के समय दूधिया रोशनी में दरबार साहिब की आभा देखते ही बन रही है।
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श्री झंडे जी पर तीन तरह के गिलाफों का आवरण होता है। सबसे भीतर की ओर सादे गिलाफ चढ़ाए जाते हैं इनकी संख्या 41 होती है। मध्यभाग में शनील के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं इनकी संख्या 21 होती है। सबसे बाहर की ओर दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है इनकी संख्या एक होती है। इस साल नई दिल्ली के बलजिंदर सिंह सैनी को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।