तृतीय केदार तुंगनाथ में शीतकाल में पर्यटकों की आवाजाही पर हक-हकूकधारी मक्कू गांव के ग्रामीणों ने रोष जताया है। उन्होंने जिला प्रशासन से मंदिर परिसर में लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग की है। नवंबर में कपाट बंद होने के बाद भी तुंगनाथ मंदिर क्षेत्र में पर्यटन के नाम पर लोगों की आवाजाही बनी है।
शीतकाल में क्षेत्र में बर्फबारी के चलते दो माह से क्षेत्र में बर्फ का आनंद लेने पर्यटक पहुंच रहे हैं, जो मंदिर परिसर में भी जा रहे और वहां घंटी बजा रहे हैं। जबकि शीतकाल में आराध्य भगवान समाधि में लीन रहते हैं। मंदिर के मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी का कहना है कि परंपराओं के तहत हिमालय की तलहटी पर स्थित पंचकेदार मंदिरों में शीतकाल में मानव का प्रवेश निषेध रहता है।
ये भी पढ़ें...
जनसुनवाई: लोगों का छलका दर्द, कहा- ऊर्जा निगमों के कर्मचारी बिजली की बर्बादी से नहीं चूकते, जनता उनका बोझ क्यों भुगते
शीतकाल में बाबा समाधि में लीन रहते हैं, लेकिन पर्यटन के नाम पर मंदिर परिसर में पहुंच रहे पर्यटक आराध्य की समाधि को भंग कर रहे हैं। हक-हकूकधारी हरिबल्लभ मैठाणी, मुकेश मैठाणी, चंद्रबल्लभ मैठाणी, प्रकाश मैठाणी, ग्राम प्रधान विजयपाल सिंह नेगी, ईको पर्यटन समिति चोपता के अध्यक्ष भूपेंद्र मैठाणी का कहना है कि वर्ष 2017/18 में प्रशासन ने शीतकाल में तुंगनाथ मंदिर में होमगार्ड की तैनाती कर सुरक्षा इंतजाम की बात कही थी, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।