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जानिए एक ऐसे मंदिर के बारे में, जहां खुद देवताआें ने की थी मूर्ति की स्थापना

Mon, 08 May 2017 11:18 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड को देवभूम‌ि यूं ही नहीं कहा जाता। मानसखंडों के मुताब‌िक उत्तराखंड में केवल देवी-देवताओं की ही सत्ता चलती है। लेक‌िन उत्तराखंड में एक ऐसा मंद‌िर भी है जहां रखी गई भगवान व‌िष्‍णु की मूर्त‌ि को खुद देवताओं ने स्थाप‌ित क‌िया था। 
 
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हम आपको बताते हैं क‌ि उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश और दुन‌िया में व‌िख्यात तीर्थ बद्रीनाथ या बद्रीनारायण में ज‌िस मूर्त‌ि की पूजा होती है उसके स्थाप‌ित होने के पीछे की कहानी क्या है।
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कहा जाता है क‌ि बदरीनाथ की मूर्ति शालग्रामशिला से बनी हुई है। यह मूर्त‌ि चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। जानकारों के मुताब‌िक यह मूर्ति देवताओं ने नारदकुण्ड से निकालकर स्थापित की थी। 

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सिद्ध, ऋषि, मुनि इसके प्रधान अर्चक थे। जब बौद्धों का प्राबल्य हुआ तब उन्होंने इसे बुद्ध की मूर्ति मानकर पूजा आरम्भ की। शंकराचार्य की प्रचार-यात्रा के समय बौद्ध तिब्बत भागते हुए मूर्ति को अलकनन्दा में फेंक गए। 
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तब शंकराचार्य ने अलकनन्दा से पुन: बाहर निकालकर उसकी स्थापना की। इसके बाद मूर्ति पुन: स्थानान्तरित हो गयी और तीसरी बार तप्तकुण्ड से निकालकर रामानुजाचार्य ने इसकी स्थापना की।
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बता दें क‌ि बदरीनाथ उत्तर दिशा में हिमालय की उपत्यका में अवस्थित हिन्दुओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। मन्दिर में नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। 
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