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Uniform Civil Code: करीब ढाई लाख सुझाव लिए और 30 बैठकों में रायशुमारी....ऐसे तैयार हुई यूसीसी की रिपोर्ट

Tue, 06 Feb 2024 01:51 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
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यूसीसी - फोटो : amar ujala
दशकों से एक बड़ा वर्ग देश में एक समान कानून लागू करने की वकालत कर रहा है। केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा वर्षों से देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का अवसर देख रही है। ऐसे में छोटे से राज्य उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने का बड़ा फैसला ले लिया। उसके इस फैसले पर देश और दुनिया की निगाह है। करीब ढाई लाख सुझावों और 30 बैठकों में रायशुमारी के बाद ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जानिए यूसीसी रिपोर्ट कैसे तैयार की गई....

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। कमेटी ने राज्य के सभी लोगों के व्यक्तिगत नागरिक मामलों को नियंत्रित करने वाले सभी प्रासंगिक कानूनों की जांच करने और मसौदा कानून या मौजूदा कानून में संशोधन की रिपोर्ट तैयार की। समिति में सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली, पूर्व मुख्य सचिव, पूर्व कुलपति और एक सामाजिक कार्यकर्ता को सदस्य बनाया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव दृष्टिपत्र जारी होने के बाद राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा की थी। उन्होंने भाजपा के सत्ता में वापसी करने के बाद सबसे पहले समान नागरिक संहिता के मामले में निर्णय लेने का एलान भी किया था। सत्ता में आने के बाद पहली ही कैबिनेट में धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया।
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UCC - फोटो : amar ujala
इसके बाद अपर मुख्य सचिव गृह राधा रतूड़ी के आदेश पर समिति के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। समान नागरिक संहिता के परीक्षण और इसे लागू करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन को राज्यपाल ने मंजूरी प्रदान की।
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यूसीसी - फोटो : amar ujala

ये विशेषज्ञ हैं समिति में

समान नागरिक संहिता के परीक्षण और उसे लागू करने के लिए गठित समिति में न्यायाधीश (सेनि.) रंजना प्रकाश देसाई को अध्यक्ष बनाया गया। रंजना देसाई उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रही हैं और जम्मू और कश्मीर के लिए गठित परिसीमन आयोग की अध्यक्ष भी रही हैं। समिति में सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़, पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह और दून विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल को सदस्य बनाया गया है।
 

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सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : amar ujala
इनसे जुड़े कानूनों की जांच और संशोधन के समिति ने दिए सुझाव 
विशेषज्ञ समिति ने उत्तराखंड राज्य में रहने वाले सभी लोगों के व्यक्तिगत नागरिक मामलों को नियंत्रित करने वाले सभी प्रासंगिक कानूनों का अध्ययन व जांच की। उनमें जरूरी संशोधन पर अपनी रिपोर्ट तैयार की। समिति विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार से संबंधित लागू कानून, विरासत, गोद लेने और देखभाल और संरक्षता आदि का परीक्षण किया। 

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सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : amar ujala
एकरूपता के लिए कमेटी
चुनाव के समय संकल्प पत्र में किए वादे के अनुरूप समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। देवभूमि की संस्कृति को संरक्षित करते हुए सभी धार्मिक समुदायों को एकरूपता प्रदान करने के लिए उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश (सेनि.) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में विशेष समिति बनाई गई। - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

 

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सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : amar ujala

कब क्या हुआ
- 12 फरवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा की थी।
- 29 मार्च को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में यूसीसी को लागू करने और इसका ड्राफ्ट बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया।
- 27 मई को प्रदेश सरकार ने विशेषज्ञ समिति के गठन की अधिसूचना जारी की।

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UCC: CM Pushkar Singh Dhami - फोटो : Amar Ujala
ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों के सुझाव
समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए गठित समिति ने डेढ़ साल में ढाई लाख से भी ज्यादा लोगों के सुझाव, विचार लिए। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित ड्राफ्ट कमेटी प्रदेश में हर वर्ग, हर समुदाय, हर जाति के प्रमुख हितधारकों से वार्ता कर ड्राफ्ट तैयार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा राज्य दो-दो अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा है। धर्म, अध्यात्म एवं संस्कृति का केंद्र है। राज्य हित में उत्तराखंड में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए 600 हेक्टेयर का लैंड बनाया गया है
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