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देखिए, किस तरह धर्मनगरी में संस्कारित हो रहे तिहाड़ में बंद अपराधी

Fri, 23 Sep 2016 10:05 PM IST
कुणाल दरगन / अमर उजाला, हरिद्वार
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देश की राजधानी दिल्ली की तिहाड़ जेल के 18 कैदियों की संस्कार पाठशाला धर्मनगरी हरिद्वार में चल रही है। चौदह दिन की रूपांतरण यात्रा पर पहुंचे यह सभी कैदी सनातन संस्कृति से रूबरू होंगे। बिना सिक्योरिटी तामझाम के कैदियों ने तिहाड़ जेल की चौखट से बाहर कदम रखा। तिहाड़ जेल में योग की अलख जगा रहे पंचवटी योगाश्रम एंड नेचर केयर सेंटर के परमाध्यक्ष योगऋषि स्वामी आशुतोष के माध्यम से यह लोग यहां पहुंचे।
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पिछले एक साल से कैदियों को रूपांतरण यात्रा पर ले जाने के लिए प्रयासरत स्वामी आशुतोष को आखिरकार कामयाबी मिल ही गई। बुधवार को वे लग्जरी एसी बस में अपने 25 सहयोगियों की टीम के साथ 18 कैदियों को लेकर यहां पहुंचे। भूपतवाला के चेतन ज्योति आश्रम में बिना सिक्योरिटी के ठहरे सभी कैदी बृहस्पतिवार सुबह हरकी पैड़ी पर पहुंचे।

 
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गंगा में डुबकी लगाने के बाद कैदियों ने मालवीय द्वीप पर मुंडन संस्कार कराया। इसके बाद सभी आश्रम लौट आए। गंगा स्नान के दौरान यह सभी कैदी भावुक नजर आए। कैदियों की अश्रुधारा देखकर उनकी देखरेख में आया हर शख्स भी अपने आप को रोक नहीं पाया। स्वामी आशुतोष ने बताया कि 14 दिन की रूपांतरण यात्रा में श्राद्ध तर्पण, उपनयन संस्कार, मंत्र जाप, गंगा स्नान, दैनिक यज्ञ, रुद्राभिषेक, प्रवचन, सत्संग, संकीर्तन, योग, गंगा स्नान करेंगे।

 

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स्वामी आशुतोष का कहना कि उनका मकसद है कि, जेल से आजाद होने के बाद ये सभी कैदी एक बदले या अपराध की राह चलने की भावना न लेकर जाएं, यही उनका प्रयास है। वे बताते है कि, एक साल बाद उन्हें ये मौका मिल पाया है। संस्था ने प्रथम चरण में 550 कैदियों का चयन किया। फिर वे उन सभी कैदियों से मिले। तब कही जाकर 18 कैदियों का चयन हुआ। तिहाड़ जेल से यह सभी कैदी फरलो पर बाहर निकले हैं। फरलो भी एक तरह की छुट्टी है, जैसे कि पैरोल होती है।

 
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कई साल से तिहाड़ जेल को ही अपनी दुनिया मान बैठे कैदियों ने जब रंग बिरंगी दुनिया में कदम रखा तो उनकी आंखें चौंधिया सी गई। बस एक टक कभी किसी इंसान को निहारते रहे तो कभी भौतिक सुख संसाधन को देखते रहे, जिसकी कल्पना ही केवल अब तक वे करते आए थे। तिहाड़ जेल की दहलीज से बाहर कदम रखने के बाद जब कैदियों ने थोड़े दिन की आजादी की जब अंगड़ाई ली तो उनके चेहरे पर मुस्कान देखते बनती थी। ये बताते हुए स्वामी आशुतोष बेहद ही प्रसन्न हो गए।

 
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बकौल स्वामी कि, कैदियों को उम्मीद ही नहीं थी कि वे सजा पूरी कर पाने से पहले कभी जेल से बाहर कदम भी रख पाएंगे या नहीं। उन्होंने बताया कि वे सब अनुशासन प्रिय है और उनकी खुशी को कोई ठिकाना ही नहीं है। उन्होंने बताया कि कोई कैदी छह तो कोई सोलह साल की सजा काट चुका है। ये सब तिहाड़ में भी अलग अलग जिम्मेदारी निभाते हैं।


 
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चेतन ज्योति आश्रम के एक बड़े हाल में सुस्ता रहे कैदी से जब जेल से बाहर आने की बाबत पूछा तो उसका कहना था कि मुझे सोलह साल हो गए दुनिया कितनी बदल गई है। जिंदगी का एक चौथाई हिस्सा जेल में ही बीता दिया। केवल अखबार या टीवी में ही इस दुनिया के रंग देखते थे। अब खुद की आंखों से देखा लिया, दुनिया बेहद खूबसूरत है। कमोवेश ये ही शब्द हर किसी कैदी के थे। किसी किसी से जब यह सवाल पूछा तो उसकी आंख ही भर आई।
 
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आश्रम में तिहाड़ कैदियों के खाने पीने की बेहतर व्यवस्था की गई है। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे इन कैदियों को सनातन संस्कृति के करीब ले जाने का मौका मिला। भविष्य में इस तरह के मौके जितनी बार भी मिलेंगे, उसे बेहतर ढंग से निभाना की इच्छा है। 
- स्वामी ऋषिश्वरानंद, परमाध्यक्ष, चेतन ज्योति आश्रम
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