पति की लंबी उम्र की कामना के साथ ही गोरखाली महिलाओं ने तीज का व्रत रखा। इस दौरान शादीशुदा महिलाओं ने हाथों में मेहंदी सजाकर और लाल जोड़े में पूजा कर व्रत खोला। साथ ही झूमकर जश्न मनाया। तस्वीरें देखिए...
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‘एकइ धर्म एक व्रत नेमा, कायं वचन मन पति पद प्रेमा’ यानी स्त्री के लिए एक ही धर्म एक ही व्रत और एक ही नियम है। वो यह कि शरीर वचन और मन से पति के चरणों में प्रेम करना। कुछ इसी धारणा के साथ आज भी महिलाएं पति के पैरों को धोकर, उसी पानी को पीकर अपना व्रत खोलती हैं।
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गोरखाली महिलाएं हरितालिका तीज व्रत को कुछ इसी तरह से निभाती आ रही हैं। बुधवार रात 12 बजे से शुरू हुआ व्रत शुक्रवार सुबह चार बजे खोला जाएगा। गोरखाली महिलाओं ने बृहस्पतिवार को हरितालिका तीज व्रत किया। इस निर्जला व्रत को रख महिलाओं ने जहां दिन में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए। वहीं रातभर जागकर पति की लंबी आयु की कामना के साथ ही अपने-अपने अखंड दीये की रक्षा की।
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लाल साड़ी और पारंपरिक गहनों में सजी महिलाओं ने समूहों में बैठकर शिव-पार्वती जी की पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। पंडित राजेंद्र थपलियाल ने बताया कि श्री राम चरित मानस में अरण्यकांड में अनसूया जी (अत्रि ऋषि की पत्नी) सीता जी को पतिव्रत धर्म समझाते हुए कहती हैं कि ‘एकइ धर्म एक व्रत नेमा, कायं वचन मन पति पद’। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी महिलाएं इसी धारणा पर चलती हैं। व्रत कर पति के चरण-स्पर्श करती हैं और पति की आरती उतारती हैं।
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गढ़ी कैंट की कलिंगा कॉलोनी निवासी गीता श्रेष्ठा की शादी को 35 वर्ष हो गए, लेकिन वह हरितालिका तीज व्रत नहीं रखतीं। गीता ने बताया कि श्रेष्ठा जाति के लोग यह व्रत नहीं करते। घर पर भी सास ने भी यह व्रत नहीं किए, इसलिए उन्होंने भी नहीं किया। लेकिन पूजा में पूरी रात बैठती हैं। नृत्य-गायन भी करती हैं। लाल साड़ी के साथ ही गहनों में पूरी तरह सजती हैं।
गल्जवाड़ी के इंदिरा नगर में रहने वालीं हरिकला 17 सालों से हरितालिका तीज व्रत कर रही हैं। हरिकला ने बताया कि पति अफगानिस्तान में काम करते हैं इसलिए वीडियों कॉलिंग से ही वह पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं।