अरुणाचल के लोअर सुबनसीरी जिले में भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं। यह स्थान राजधानी इटानगर से करीब 180 किमी. दूर है। यह अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है।
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यह क्षेत्र अपतानी जनजाति बहुल क्षेत्र है। यहीं सबसे ऊंचा शिवलिंग मौजूद है।
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2004 में इस शिवलिंग की खोज की गई थी। ये शिवलिंग कैसे मिला इसकी भी अलग कथा है।
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कहा जाता है कि एक लकड़हारा इस स्थान से कुछ दूरी पर पेड़ काट रहा था। पेड़ के एक तरफ छोटा गांव था और दूसरी ओर घना जंगल था।
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लकड़हारे ने यह विशाल पेड़ काटकर जंगल की तरफ गिराना चाहा, लेकिन लाख कोशिशों के बाद यह पेड़ उस जंगल की तरफ न गिर कर दूसरी ओर गिरा। यह देख लकड़हारा आश्चर्य चकित हो गया।
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जब उसने जंगल में जाकर देखा तो वहां उसे भव्य शिवलिंग दिखाई दिया। तब से यहां पर पूजा-अर्चना शुरू की गई।
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श्रीसिद्घेश्वरनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी बैल विराजमान हैं। नंदी के आगे आकाश को चूमता हुआ भव्य शिवलिंग मौजूद है। इसकी ऊंचाई 24 फीट है।
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इस शिवलिंग की खास बात यह है कि यह एक मात्र जगह है जहां भगवान शिव अपने परिवार के साथ विराजमान है। पुराणों में भी इस शिवलिंग का वर्णन है।
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इसके बगल में एक ओर शिवलिंग है जिसे पार्वती के रूप में पूजा जाता है। शिवलिंग के दाएं ओर स्थित है भगवान शिव के दूसरे पुत्र कार्तिक की आकृति।
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भव्य शिवलिंग के बाएं ओर आपको भगवान गणेश के दर्शन होंगे।
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यह भव्य शिवलिंग लोगों को अंचभित करता है। शिवलिंग के नीचे गंगा की फूटती धारा अपने आप में चमत्कार है।
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इसी जल से शिव का अभिषेक होता है। इसके साथ ही शिवलिंग पर जनेऊ जैसी आकृति भी मौजूद है।
(फोटो/स्टोरीः अनिल दत्त शर्मा, पाठक)