यह पर्वत शिव-पार्वती का घर माना जाता है। सदियों से देवता, दानव, योगी, मुनि और सिद्ध महात्मा यहां तपस्या करते आए हैं। हर साल यहां हजारों भक्त दर्शन को पहुंचते हैं।
विज्ञापन
2 of 8
kailas mount
इतना ही नहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान पर्वत पर बर्फ से 'ऊं' बन जाता है
विज्ञापन
3 of 8
kailas mount
सूर्य की पहली किरण जब कैलाश पर्वत पर पड़ती है तो वह सोने जैसा प्रतीत होता है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने अपने मन-मस्तिष्क से मानसरोवर बनाया है। दरअसल, मानसरोवर संस्कृत के मानस (मस्तिष्क) और सरोवर (झील) शब्द से बना है।
4 of 8
kailas mount
कैलाश मानसरोवर की यात्रा में हर कदम बढ़ाने पर दिव्यता का अहसास होता है। ऐसा लगता है मानो एक अलग ही दुनिया में आ गए हों।
विज्ञापन
5 of 8
kailas mount
मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति मानसरोवर (झील) की धरती को छू लेता है, वह ब्रह्मा के बनाये स्वर्ग में पहुंच जाता है और जो व्यक्ति झील का पानी पी लेता है, उसे भगवान शिव के बनाये स्वर्ग में जाने का अधिकार मिल जाता है।
विज्ञापन
6 of 8
कैलास मानसरोवर यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि ब्रह्ममुहुर्त (प्रात:काल 3-5 बजे) में देवता गण यहां स्नान करते हैं।
विज्ञापन
7 of 8
कैलास मानसरोवर
- फोटो : file photo
ग्रंथों के अनुसार, सती का हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई, इसलिए इसे 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना गया है।
गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ पिघलती है, तो एक प्रकार की आवाज भी सुनाई देती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह मृदंग की आवाज है। एक किंवदंती यह भी है कि नीलकमल केवल मानसरोवर में ही खिलता और दिखता है।