उत्तरकाशी में प्राचीन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शिव के साथ शक्ति की उपासना भी होती है। नवरात्रि में विशेष रुप से श्रद्धालु देवी स्वरूप शक्ति स्तंभ (त्रिशूल) की पूजा-अर्चना और चुनरी चढ़ाने के लिए यहां दूर-दूर से पहुंचते हैं। इसे 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि माना गया है।शहर के मध्य में स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में एक चबूतरे पर गर्भगृह में 56 सेमी. ऊंचा शिवलिंग प्रतिष्ठापित है, वहीं मंदिर के ठीक सामने प्रांगण में शक्ति माता का मंदिर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने इस शक्ति का निर्माण किया, जिससे देवताओं ने राक्षसों का अंत किया। त्रिशूल रूपी इस शक्ति स्तंभ की ऊंचाई 21 फुट है। जमीन के अंदर यह कितनी गहराई तक है, यह जानने के लिए खोदाई भी की गई, लेकिन अभी भी यह रहस्य बना हुआ है। वर्ष 1808 में अंग्रेज रीपर ने अपने एक लेख में लिखा है कि वर्ष 1803 के भूकंप में मंदिर ढह गया था, लेकिन यह शक्ति स्तंभ सुरक्षित रहा।