radha ashatmi
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महत्व:
शरद पूर्णिमा की रात में आज भी ब्रह्मांड में कहीं राधा-कृष्ण का महारास होता है। 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा की रोशनी होते ही 64 कलाओं के अवतार भगवान कृष्णा राधा के साथ महारास रचाते हैं। द्वापर में बृज में भी इसी दिन गोपियों के साथ कृष्ण ने महारास किया था। ब्रह्मा के दरबार में शरद पूर्णिमा की रात्रि में महारास करते हुए राधा-कृष्ण जलरूप हो गए और वही जल गंगा बनी। शरद पूर्णिमा का पर्व अश्विन शुक्ल कृष्ण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि 16 कलाओं से युक्त पूर्ण चंद्र से इस रात्रि सोम वृष्टि होती है। शरद पूर्णिमा वास्तव में शरद का समापन और हेमंत ऋतु का आगमन पर्व भी है।