कालेश्वर महादेव
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चार से साढ़े पांच फीट गहराई में जब गणेश, अंबा, कार्तिकेय, शिव परिवार की मूर्तियां मिली, तो वह शिवलिंग उससे नीचे नहीं गया और इससे नीचे खोदाई भी संभव नहीं हो पाई, जिसके बाद से यहां प्रकट स्वयंभू शिवलिंग को कालेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है।