कनखल के राजा ब्रह्मा पुत्र दक्ष को दिया वचन निभाने के लिए भगवान शंकर कैलाश से अपनी ससुराल पहुंच गए हैं। श्रावण मास में अब एक महीने तक वे यहीं निवास करेंगे। छह अगस्त को शिवरात्रि की महारात्रि में चार प्रहर पूजा की जाएगी। शिव चौदस के दिन भी जलाभिषेक चलता रहेगा।
आषाढ़ पूर्णिमा में श्रावण प्रतिपदा का समावेश होते ही कनखल पहुंचने पर पूर्णिमा ने भगवान शंकर का स्वागत किया। श्रावण मास के पहले दिन आज रविवार है। भगवान आशुतोष का आगमन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में हुआ और श्रवण नक्षत्र में प्रतिपदा पूर्ण होगी।
गंगा सभा विद्वत परिषद सदस्य पंडित अमित शास्त्री के अनुसार इस बार द्वितीय तिथि क्षय हो जाने के कारण सोमवार को तृतीया तिथि पड़ जाएगी। शिवालयों में प्रत्येक सोमवार को विशेष जलाभिषेक होगा। शिवरात्रि और शिव चौदस के मिलन पर भगवान शिव के मंदिरों में महारात्रि मनाई जाएगी। भगवान शिव श्रद्धा के देव हैं। उन्हीं की जटाओं से निकली गंगा से उनका अभिषेक सावन के पूरे महीने में किया जाता रहेगा।