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जानिए, देखते ही देखते आखिर कैसे उधड़ जाते हैं पहाड़?

Tue, 28 Jun 2016 08:31 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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बदरीनाथ हाईवे पर पिनौला में तीर्थयात्री स्वयं हाईवे पर आए पत्थरों को हटाते हुए। - फोटो : file photo
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन होने, चट्टान टूटने और पहाड़ी के उधड़ने की घटनाएं अक्सर देखी जाती हैं। पिछले कुछ दिनों में बदरीनाथ हाईवे पर भी ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं। मूसलाधार बारिश से बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में करीब बीस मीटर और खचरा नाले में करीब दस मीटर तक बह गया है। इस वजह से हाईवे साढ़े बारह घंटे तक अवरुद्ध रहा। आइए जानते हैं ये भूवैज्ञानिक घटना कैसे होती है।
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देखते ही देखते आखिर कैसे खिसक जाती है पैरों तले की जमीन, जानिए

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बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में गदेरे में तब्दील हुआ। यहां पर बीआरओ ने गदेरे के ऊपर ही वैकल्पिक मार्ग बनाकर हाईवे को सुचारु किया है। - फोटो : file photo
चट्टानों के गिरने को भूस्खलन कहते हैं। भूक्षरण अथवा मृदा अपरदन की प्रक्रिया के कारण पर्वतों का निरंतर विघटन होता रहता है। चट्टानों की बनावट तथा एक बिन्दु विशेष पर मौसम के प्रभाव के अनुसार चट्टानें टूट कर नीचे की ओर गिरती हैं। नीचे गिरती चट्टानें अपने साथ वनस्पतियां, वृक्ष तथा मिट्टी को भी नीचे गिराती हैं। कभी तो हाथ अथवा पैर के दबाव से ही भगुंर किस्म की चट्टानें टूट जाती हैं।
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badrinath highway washed away due to heavy rain - फोटो : file photo
भूस्खलन एक भूवैज्ञानिक घटना है। धरातली हलचलों जैसे पत्थर खिसकना या गिरना, पथरीली मिटटी का बहाव, इत्यादि इसके अंतर्गत आते हैं। भू-स्खलन कई प्रकार के हो सकते हैं और इसमें चट्टान के छोटे-छोटे पत्थरों के गिरने से लेकर बहुत अधिक मात्रा में चट्टान के टुकड़े और मिटटी का बहाव शामिल हो सकता है तथा इसका विस्तार कई किलोमीटर की दूरी तक हो सकता है।

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badrinath highway closed - फोटो : file photo
भारी वर्षा तथा बाढ़ या भूकम्प के आने से भू-स्खलन हो सकता है। मानव गतिवधियों, जैसे कि पेड़ों और वनस्पति के हटाने, सड़क किनारे खड़ी चट्टान के काटने या पानी के पाइपों में रिसाव से भी भू-स्खलन हो सकता है। गढ़वाल में बरसात के दौरान बदरीनाथ हाईवे पर सबसे ज्यादा भूस्‍खलन की घटनाएं होती हैं और यह एक गंभीर भूगर्भिक घटना है। भारी मूसलाधार बरसात या भूकम्‍प भी भूस्‍खलन का कारण बन सकते हैं।
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पिथौरागढ़-तवाघाट नेशनल हाइवे रहा बंद - फोटो : file photo
पहाड़ और पर्वतों की पारिस्थितिकी बेहद नाजुक व भंगुर होता है। किसी भी तंत्र अथवा संस्थान का विकास उसकी इकाईयों द्वारा प्रतिक्रिया व उत्पादन शक्ति पर निर्भर करता है। इसमें पर्वत कमजोर होते हैं। उनमें स्थित जीवों में तीव्र प्रतिक्रिया का अभाव तो होता ही है साथ ही वहां उत्पादन क्षमता भी बहुत सीमित होती है।
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badrinath highway washed away due to heavy rain - फोटो : file photo
पर्वतीय परिस्थितियों के अनुकूल प्रजातियों ने कई शताब्दियों तक अपने को सफलतापूर्वक ढाला है। परन्तु आज हम अभूतपूर्व रुप से हो रहे तीव्र बदलाव को देख रहे हैं। पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर तेजी से मंडराते जोखिम इसी तीव्रता तथा अभूतपूर्व बदलावों का नतीजा है, जिसकी गति से पर्वतीय पारिस्थितिकी अपने को ढालने में असमर्थ हैं। यह तीव्र बदलाव प्रत्यक्ष रुप से मानवीय गतिविधियों का ही परिणाम है।
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जोशीमठ हाईवे - फोटो : file photo
पृथ्वी में मौजूद हर चीज गुरुत्वाकर्षण के अधीन है और ऊपर से नीचे की और बहती या गिरती है। भूस्‍खलन एक प्राकृतिक क्रिया है। जिस भाग में कम एनर्जी होती है वह खिसक कर नीचे आ जाता है। लोगों की हस्तक्षेप से भी भूस्‍खलन और कटाव जैसी घटनाएं बढ़ी हैंद्घ
- पीयूष रौतेला, अधिशासी निदेशक, आपदा निवारण एवं प्रबंधन केंद्र

Published By : Nirmala Suyal
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