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- फोटो : vinay vasu
बकरी स्वयंवर...मंत्री जी की तौबा-तौबा
बचपन में गुड्डे-गुड़िया की शादी का खेल कई बार खेला, देखा भी। यहां तक तो सब ठीक है। अब प्रचंडता के अहसास वाली सरकार आई, तो बकरियों की शादी देखने का बमुश्किल मौका हाथ आ रहा था। मगर अड़ंगा लग गया। बात ऐसी हो गई कि मंत्री जी को कहना पड़ा-तौबा-तौबा। मंत्री जी नए घर में आई हैं। नए घर के कायदे-कानून जानने में वक्त तो जरूर लगेगा। इसलिए बकरी स्वयंवर के लिए पूरी तैयारी कर ली थी। मंत्रोच्चार, विधि-विधान सब कुछ बकरी स्वयंवर में देखने को मिलना था। मगर मामला धर्म-संस्कृति का आ गया। अब धर्म-संस्कृति की पैरोकार सरकार के राज में ऐसा हो जाए, तो फिर बात ही क्या हो। इसलिए बडे़ दरबार से भी एनओसी नहीं मिल पाई। दिलचस्प बात और देखिए, मंत्री जी को नए घर के कायदे-कानून सिखाने वाले भी मंत्री महोदय ही रहे हैं। ये अलग बात है कि संस्कृति, धर्म और आध्यात्म से मंत्री महोदय का पुराना नाता है। इसलिए उन्होंने समझाया, तो फिर सब मान गए। अब बकरी स्वयंवर होगा तो सही, लेकिन मंत्र नहीं होंगे। अब ऐसे स्वयंवर का क्या मजा, जहां मंत्र नहीं होंगे। खैर... मंत्री जी का दावा है बकरी स्वयंवर का मजा कम नहीं होगा।