पूर्वजों को श्रद्धा पूर्वक स्मरण करने का अवसर श्राद्ध पक्ष 10 सितंबर यानी शनिवार से शुरू हो रहा है जो कि 25 सितंबर तक रहेगा। इन दिनों पितरों को तृप्त करने के लिए तर्पण और पिंडदान कर मोक्ष की कामना की जाएगी। पितृपक्ष के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।
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ऐसे में हम आपको बता रहे हैं ऐसी जगह के बारे में जहां पितरों का तर्णण करने का विशेष महत्व है। बदरीनाथ धाम में स्थित ब्रह्मकपाल में पितृ तर्पण का विशेष महातम्य है। मान्यता है कि यहां पिंडदान करने से अन्य तीर्थों के मुकाबले आठ गुना अधिक पुण्य मिलता है।
बदरीनाथ मंदिर से करीब 200 मीटर की दूरी पर अलकनंदा नदी के किनारे ब्रह्मकपाल तीर्थ स्थित है। इसे कपाल मोचन तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर पितृ तर्पण या पिंडदान करने का विशेष महत्व है। ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित बृजेश सती और मदन कोठियाल कहते हैं कि गया और काशी में भी पिंडदान किया जाता है लेकिन ब्रह्मकपाल में पिंडदान का विशेष महत्व है।