टिहरी के घनसाली में आसमान साफ होने पर लोग मलबे में दबे सामान को तलाशने में जुटे रहे। जिंदगी भर की कमाई से बनाए मकान के मलबे में बदलने से लोगों के चेहरों पर पीड़ा और आंखों में आंसू थे। उन्हें गुस्सा इस बात का भी था कि राहत एवं बचाव कार्य के लिए भेजी गई एसडीआरफ और पुलिस की टीम तमाशबीन बनी रही।
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बादल फटने की अगली सुबह ढूंढते रहे ‘जिंदगी की कमाई’, तस्वीरें...
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people search their luggage in ghansali cloudburst area
प्रभावित क्षेत्र में तबाही के दूसरे दिन रविवार को भी बिजली और पानी की आपूर्ति नहीं होने से दिक्कतें और गहराई हुई हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावितों के लिए खाना और प्रति परिवार तीन हजार आठ सौ रुपये की मदद दी गई है। शनिवार को दोपहर बाद बालगंगा घाटी में हुई तेज बारिश के साथ चार-पांच जगह बादल फटने से वहां भारी तबाही मच गई।
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ग्रामीणों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। स्कूल में रात बिताने के बाद रविवार सुबह तबाही का मंजर देख पीड़ितों की आंखें भर आई। मदद के लिए पहुंचे नाते-रिश्तेदार और आसपास गांव के लोगों की मदद से मलबे से दबे सामान निकालने का प्रयास किया। जिन घरों को बड़ी मेहनत से बनाया था उनकी दीवारों को तोड़कर कुछ बचा हुआ सामान बाहर निकाला।
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इस दौरान मदद के लिए गई एसडीआरएफ और पुलिस के जवानों के मूकदर्शक बने रहने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। कोठियाड़ा के विजय जोशी, मनीषा जोशी, लोकेंद्र और मनोज ने कहा कि एसडीआरफ और पुलिस ने मलबे में दबा सामान निकालने में कोई मदद नहीं की।
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उन्होंने बताया कि गांव में बिजली-पानी की सप्लाई ठप है। मौके पर पहुंचे डीएम इंदुधर बौड़ाई, एसएसपी बरिंदर जीत सिंह और एडीएम जगदीश लाल ने प्रभावित गांवों का दौरा कर प्रभावितों को हर संभव मदद देने और बिजली-पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।