नोटबंदी के बाद नए नोटों के बदले हुए साइज की वजह से देशभर के दृष्टिबाधित परेशान थे। उन्हें 2000 रुपये का नोट 20 और 500 का नोट 10 रुपये का प्रतीत हो रहा था।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 6
note ban
- फोटो : amar ujala
इस समस्या के हल के लिए राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (एनआईवीएच) ने करेंसी आइडेंटिफायर डिवाइस तैयार की है। जल्द ही डिवाइस का प्रोडक्शन शुरू होने जा रहा है।
विज्ञापन
3 of 6
note ban
एनआईवीएच में वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी मनीष वर्मा ने बताया कि देशभर के दृष्टिबाधितों को नए नोटों को पहचानने में दिक्कत हो रही थी। नए नोटों में पहली बार नोटों के साइज की परंपरा टूटी है।
4 of 6
note ban
लिहाजा, दृष्टिबाधितों के लिए नए नोट को पहचानना वाकई चुनौती था। इससे निपटने के लिए ही उन्होंने करेंसी आइडेंटिफायर डिवाइस तैयार की है। यह ऐसी डिवाइस है, जिस पर नोट रखकर उसके साइज के हिसाब से ही यह पता चल जाता है कि वह कितने रुपये का नोट है।
विज्ञापन
5 of 6
blind
इस डिवाइस में न केवल 500 और 2000 रुपये के नए नोट बल्कि पुराने नोटों की भी पहचान आसान है। एनआईवीएच की निदेशक डा. अनुराधा ने बताया कि डिवाइस को प्रोडक्शन में लाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। इसकी कीमत अभी तय नहीं हुई है, लेकिन यह बेहद सस्ती रखी जाएगी।
इस डिवाइस को तैयार करने का मकसद यह है कि जो दृष्टिबाधित ब्रेल लिपि नहीं भी जानते हैं, इस डिवाइस से वह भी आसानी से नोट पहचान जाएंगे। डिवाइस पर ब्रेल लिपी के अलावा कुछ बिंदु बनाए गए हैं। इस पर नोट को लपेटने के बाद साइज के हिसाब से यह जिस बिंदु पर आकर रुकता है, उसी के हिसाब से नोट का अनुमान लगाया जा सकता है। मसलन अगर सबसे पहले बिंदु पर रुकेगा तो समझो कि यह 2000 रुपये का नोट है। सबसे बाद के बिंदु पर रुकने वाला पांच या दस रुपये का नोट होगा।