झीलें तो आपने बहुत देखी होंगी, लेकिन दुनियाभर की समुद्री मछलियों से भरी इस झील के बारे में क्या आप जानते हैं? क्या कभी गौर किया है कि इस खूबसूरत झील के बीच ये टापू(आइसलैंड) कहां से आया। तो चलिए हम आपको बताते हैं इसका रहस्य...
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भीमताल झील का नजारा बेहद मनमोहक है। मान्यता है कि जब पांडव पुत्र भीम अपने भाईयों के साथ निर्वासन पर आए तो यहां उन्हें प्यास लगी। उनके भाईयों को इस दौरान प्यास लगी। लेकिन वहां दूर दूर तक कोई स्त्रोत नहीं था।
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इसलिए उन्होंने यहां पानी के लिए जमीन खोद डाली। लेकिन जब वहां चारों ओर पानी ही पानी हो गया तो भाईयों को चिंता हो गई। उन्होंने कहां कि यहां से पानी कैसे रोका जाए। इसलिए भीम इधर उधर कुछ ढूंढूने लगे।
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यहां उन्हें एक पहाड़ दिखाई दिया। कोई उपाए नही सूझा तो उन्होंने पहाड़ ही उठाकर स्त्रोत पर रख दिया। जिसके बाद वहां पानी रुक गया और वहां झील बन गई। तब से यह टापू इस झील की शोभा बढ़ा रहा है।
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इस टापू पर कुछ बड़े-बड़े पेड़ लगे होने के कारण यह दूर से और भी सुन्दर नजर आता हैं। यहां इसके पास ही भीमेश्वर मंदिर भी बना है। यहां लोग झील देखने के बाद पूजा भी करते हैं।
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पहले यहां रेस्टोरेंट बनाया गया था। लेकिन झील में रेस्तरा के द्वारा गंदगी फैलाए जाने के कारण इस टापू पर रेस्तरा की जगह एक मछलीघर बना दिया गया । इस मछलीघर में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों को देखने के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क अदा करना होता हैं ।
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कुमाऊँ मंडल की झील भीमताल के टापू पर इकहत्तर देशों की विभिन्न मत्स्य प्रजातियों को एकत्रित कर एक विश्व स्तरीय एक्वैरियम का निर्माण किया गया है।
पर्यटक यहाँ डेल्टा से लेकर समुद्र तक तथा कोरल सी से लेकर मीठे पानी की नदियों तक की मत्स्य प्रजातियाँ देख सकते हैं। मुख्य रूप पर जो मत्स्य प्रजातियाँ यहाँ आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं उनमें फ्लोवरहॉर्न, फिराना, करंट पैदा करने वाली मछली इल सहित चीनी प्रजाति लोहाना आदि प्रमुख हैं।